यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी में फिर बन रहा नया सिस्टम
देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नज़र आ रहा है। बंगाल की खाड़ी की ओर से बने मौसमी सिस्टम के असर से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तराखंड के कई इलाक़ों में मंगलवार सुबह तक भारी से बेहद भारी बारिश दर्ज की गई। झारखंड के ऊपर बना डिप्रेशन अब धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है, जिससे इसके रास्ते में आने वाले इलाक़ों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में खेतों में काम कर रहे किसानों से लेकर निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम पर नज़र रखना ज़रूरी हो गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, मंगलवार को डिप्रेशन झारखंड के हज़ारीबाग़ से करीब 50 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व, राँची से 80 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और गया से करीब 130 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में केंद्रित था। यह सिस्टम झारखंड और बिहार के ऊपर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है और बुधवार तक कमज़ोर होकर स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। हालांकि, कमज़ोर होने से पहले भी इसके प्रभाव वाले क्षेत्रों में तेज़ बारिश जारी रह सकती है। अगले चार दिनों में छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश होने का अनुमान है।
इन राज्यों में बारिश का असर
मौसम तंत्र के आगे बढ़ने के साथ झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश तेज़ हो सकती है। IMD ने असम और मेघालय, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।
मौजूदा डिप्रेशन के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के कारण इसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियाँ बनी रह सकती हैं। यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF के अनुमान के मुताबिक, शनिवार तक अगले चार दिनों में छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश और बिहार तथा उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का असर अधिक रह सकता है।
मानसून ट्रफ सक्रिय, बंगाल की खाड़ी में फिर बन सकता है सिस्टम
मानसून ट्रफ मंगलवार को फिरोज़पुर से देहरादून, शाहजहाँपुर, वाराणसी और डेहरी होते हुए झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के ऊपर बने डिप्रेशन तक पहुँची और इसके बाद दीघा से होते हुए दक्षिण-पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी तक फैली रही। उत्तर हरियाणा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण भी इस मौसम प्रणाली को अतिरिक्त मजबूती दे रहे हैं।
ट्रफ का पूर्वी सिरा बंगाल की खाड़ी की ओर झुकने से महीने के अंत तक एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना बनी हुई है। IMD के मौसम पूर्वानुमान मॉडल भी इस संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। अगर नया सिस्टम बनता है तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में एक बार फिर बारिश का दौर तेज़ हो सकता है। इससे मानसून का पूर्वी हिस्सा अगस्त के अंत तक सक्रिय बना रह सकता है।
देश में बारिश की कमी 13%, पूर्वी-पूर्वोत्तर भारत सबसे पीछे
देश में कुल मानसूनी बारिश की कमी मंगलवार को भी 13 प्रतिशत पर बनी रही। क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, अगस्त के बाकी दिनों में अतिरिक्त बारिश की सबसे बेहतर संभावना भी इसी क्षेत्र में बनी हुई है।
मध्य भारत की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है और यहाँ बारिश की कमी सिर्फ़ 1 प्रतिशत है। इसके बाद उत्तर-पश्चिम भारत में 12 प्रतिशत और दक्षिण प्रायद्वीप में 21 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। मौजूदा डिप्रेशन और संभावित नए निम्न दबाव क्षेत्र से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत को आने वाले दिनों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि देश के दूसरे हिस्सों में मानसून की गतिविधि अपेक्षाकृत असमान रह सकती है।