दशकों बाद गंगा में हिल्सा की वापसी! ग़ाज़ीपुर में नदी में मिलीं दो मछलियाँ, जानिए क्यों है ख़ास
गंगा की जैव विविधता को लेकर एक अच्छी ख़बर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में हिल्सा मछली की दो मछलियाँ मिली हैं, जिनका संयुक्त वज़न 740 ग्राम है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने इसे गंगा की जैव विविधता की बहाली की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया है। कभी गंगा में हिल्सा बड़ी संख्या में पाई जाती थी और यह मछली समुद्र से गंगा के रास्ते ऊपर की ओर प्रवास करते हुए प्रयागराज तक पहुँचती थी। ग़ाज़ीपुर में हिल्सा की यह नई मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि फ़रक्का बैराज के ऊपर हिल्सा के संरक्षण और रैंचिंग के प्रयास अब इसके पुराने प्रवास क्षेत्र को बहाल करने में मदद कर रहे हैं।
दशकों पहले गंगा में हिल्सा की संख्या काफ़ी अधिक थी, लेकिन प्रदूषण, बाँधों के निर्माण और प्रवास मार्गों में आई रुकावटों के कारण इसकी संख्या तेज़ी से घट गई। वर्ष 1970 में फ़रक्का बैराज बनने के बाद हिल्सा का गंगा में ऊपर की ओर प्रवास फ़रक्का से आगे लगभग रुक गया था। हिल्सा ऐसी मछली है जिसे पर्याप्त ऑक्सीजन और स्वस्थ जल प्रवाह की ज़रूरत होती है। ऐसे में ग़ाज़ीपुर में इसकी मौजूदगी गंगा के प्रवाह, घुलित ऑक्सीजन और नदी की पारिस्थितिकी में हो रहे सुधार का उत्साहजनक संकेत मानी जा रही है।
ग़ाज़ीपुर में कितनी हिल्सा मिलीं?
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अनुसार, ग़ाज़ीपुर में हिल्सा के दो नमूने दर्ज किए गए हैं। दोनों मछलियों का संयुक्त वज़न 740 ग्राम है। मिशन ने इसे गंगा की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। यह रिकॉर्ड इसलिए भी अहम है क्योंकि हिल्सा ऐतिहासिक रूप से गंगा में ऊपर की ओर प्रवास करती थी और प्रयागराज तक पहुँचती थी। ग़ाज़ीपुर में इसकी वापसी से फ़रक्का के ऊपर हिल्सा रैंचिंग के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद जगी है।
हिल्सा की वापसी क्यों है ख़ास?
हिल्सा एक प्रवासी और ऑक्सीजन की ज़्यादा ज़रूरत वाली मछली है। यह स्वस्थ जल प्रवाह और पानी में पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन वाले नदी तंत्र में पनपती है। दशकों तक प्रदूषण और प्रवास मार्गों में रुकावट के कारण गंगा में इसकी संख्या और वितरण प्रभावित हुआ। फ़रक्का बैराज के निर्माण के बाद हिल्सा के लिए ऊपर की ओर जाने का रास्ता बाधित हुआ। अब ग़ाज़ीपुर में हिल्सा का मिलना इस बात का उत्साहजनक संकेत है कि नदी की पारिस्थितिकी में सुधार और संरक्षण के प्रयासों से यह प्रजाति अपने पुराने क्षेत्र की ओर लौट सकती है।
क्या नमामि गंगे के प्रयासों का असर दिख रहा है?
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के मुताबिक, नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा की सफ़ाई और बहाली के प्रयासों के साथ फ़रक्का के ऊपर हिल्सा रैंचिंग पर भी काम किया जा रहा है। ग़ाज़ीपुर में हिल्सा की मौजूदगी को इन प्रयासों के सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मिशन का कहना है कि हिल्सा का हर नया रिकॉर्ड सिर्फ़ एक मछली की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि लगातार नदी बहाली और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों से प्रकृति को अपना खोया हुआ क्षेत्र वापस पाने में मदद मिल सकती है। गंगा में हिल्सा की वापसी नदी के बेहतर होते स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी की दिशा में एक उत्साहजनक संकेत है।