नेपाल की बाढ़ को विदेश मंत्री ने बताया ‘हिमालयन सुनामी’, नौवें दिन भी जारी है तलाश अभियान, मौतों का आंकड़ा 1252 पहुंचा
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का मंजर लगातार गंभीर बना हुआ है। फ्लैश फ्लड की इस त्रासदी में अब तक 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,875 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। आपदा के नौवें दिन, गुरुवार को भी नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दलों ने खोज और बचाव अभियान जारी रखा। बाढ़ से उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई है।
इस बीच, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस विनाशकारी आपदा को “हिमालयन सुनामी” बताया है। काठमांडू में विदेशी राजनयिकों को आपदा से हुए नुकसान की जानकारी देते हुए उन्होंने पड़ोसी देशों, मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद तथा एकजुटता के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि नेपाल इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ करीबी सहयोग और समन्वय जारी रखेगा। विदेश मंत्री ने सरकार की प्राथमिकता नेपाली और विदेशी नागरिकों को बचाना बताते हुए प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान तेज करने की जानकारी भी दी।
‘हाल के इतिहास में ऐसी भारी आपदा नहीं देखी’
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने काठमांडू में विदेशी राजनयिकों को बाढ़ से हुई तबाही की जानकारी देते हुए कहा कि वह इस आपदा को “हिमालयन सुनामी” कहना चाहते हैं, क्योंकि हाल के इतिहास में नेपाल ने इतनी बड़ी आपदा नहीं देखी है। उन्होंने पड़ोसी देशों, मित्र राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से मिले समर्थन और एकजुटता के लिए आभार जताया। इस ब्रीफिंग में विभिन्न देशों के राजदूत, राजनयिक मिशनों के प्रमुख और प्रतिनिधि, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
जलवायु उत्सर्जन के लिए बड़े देशों की ‘ऐतिहासिक जिम्मेदारी’
कुछ दिन पहले एक निजी टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में खनाल ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के तीन सबसे बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक बताया था। उन्होंने कहा था कि इन देशों की “ऐतिहासिक जिम्मेदारी” है कि वे नेपाल जैसे कमजोर देशों को मुआवजा दें। खनाल के मुताबिक औद्योगिक देश कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि नेपाल का कार्बन उत्सर्जन में योगदान बहुत कम है। उन्होंने कहा कि ऐसे में औद्योगिक देशों को नेपाल जैसे देश को मुआवजा देना चाहिए।
नौवें दिन भी जारी है खोज और बचाव अभियान
नेपाल पुलिस के मुताबिक फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद यह आंकड़ा बढ़ा है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, चितवन में 355, नवलपरासी पूर्व में 218, नवलपरासी पश्चिम में 208 और नुवाकोट में 177 शव बरामद हुए हैं। नवलपरासी पश्चिम में बरामद शवों में भारत से मिले और सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं।
इसके अलावा रसुवा में 127, गोरखा में 69, धादिंग में 60 और तनहूँ में 38 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल गुरुवार को आपदा के नौवें दिन भी खोज और बचाव अभियान में जुटे रहे। लापता लोगों की संख्या 4,875 बताई गई है। यह फ्लैश फ्लड 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद आई थी, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में व्यापक तबाही मचा दी।