तेज पछुवा हवाओं के बीच खेती कैसे बचाएं? खेती से लेकर पशुपालन तक किसानों के लिए ज़रूरी सलाह
फरवरी के महीनेमें मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और अगले कुछ दिनों के बीच तेज पछुवा हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों को अपनी खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई पर खास ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि अधिक पानी देने से फसल गिर सकती है और नुकसान बढ़ सकता है। बदलते मौसम को देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने किसानों के लिए अगले दो सप्ताह की खेती से जुड़ी अहम सलाह जारी की है।
इस हफ्ते और आने वाले हफ्ते में मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों के दौरान तेज पछुवा हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में किसानों को सिंचाई और खेत प्रबंधन में विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज हवाओं के समय अधिक सिंचाई करने से फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस अवधि में खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए। ख़ासकर गेहूं, सरसों और अन्य खड़ी फसलों में यह सावधानी जरूरी है।
जो किसान जनवरी में गेहूं की बुवाई कर पाए थे और अब तक टॉप ड्रेसिंग नहीं कर सके हैं, उन्हें यह काम समय रहते पूरा करना चाहिए। खेत में उचित नमी होने पर यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।
बागवानी करने वाले किसानों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण है। जुलाई से सितंबर के बीच लगाए गए आम, अमरूद और नींबू के नए बागों में यदि कुछ पौधे सूख गए हों या मर गए हों, तो उनकी जगह नए पौधे लगाना बेहतर रहेगा। इससे बाग का संतुलन बना रहता है और भविष्य में उत्पादन पर असर नहीं पड़ता।
सरसों और अन्य फसलों में माहू (एफिड) का प्रकोप कई जगह दिखाई देने लगा है। ऐसे खेतों में किसानों को रासायनिक दवाओं के बजाय पहले यलो स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। ये ट्रैप माहू को आकर्षित कर पकड़ लेते हैं, जिससे कीटों की संख्या कम होती है और फसल सुरक्षित रहती है।
बसंतकालीन गन्ने की बुवाई का समय भी शुरू हो गया है। किसानों को नई और उन्नत किस्मों जैसे को.शा.-13235, को.लख.-14201, को.-15023, को.शा.-17231, को.शा.-18231, को.लख.-16202, को.शा.-14233, को.से.-13452 और को.शा.-19231 की बुवाई करने की सलाह दी गई है। गन्ने के साथ सब्जियों या दलहनी फसलों की अंतरफसल लेने से अतिरिक्त आय भी प्राप्त की जा सकती है।
नदी किनारे खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय तरबूज और खरबूज की बुवाई की तैयारी का है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे समय रहते संस्तुत किस्मों के बीज की व्यवस्था कर लें, ताकि मौसम अनुकूल होने पर बुवाई की जा सके।
आलू की खुदाई के बाद जायद मक्का की बुवाई का भी यही सही समय है। इसके लिए नवजोत, आजाद उत्तम, प्रताप कंचन-2, गौरव जैसी संकुल किस्मों और पीएसी-751, दक्कन-115, एमएमएच-133, प्रो-4212, सीओएच-8 जैसी संकर किस्मों की बुवाई की जा सकती है। हरे भुट्टे के लिए माधुरी, प्रिया विन ऑरेंज और बेबी कॉर्न के लिए प्रकाश, पूसा अगेती संकर मक्का-2 तथा एचएम-4 किस्में उपयुक्त मानी जाती हैं।
पशुपालकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सूचना है। राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुओं में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) का टीकाकरण हर जिले में निःशुल्क किया जा रहा है। किसान और पशुपालक इस सुविधा का लाभ उठाकर अपने पशुओं को इस खतरनाक बीमारी से बचा सकते हैं।
ये भी पढ़ें: फरवरी महीने में दक्षिण और मध्य भारत के गन्ना किसान कर सकते हैं इस क़िस्म की खेती, नहीं रहेगा कई बीमारियों का खतरा
मत्स्य पालन करने वाले किसानों के लिए भी सलाह जारी की गई है। कॉमन कार्प मछली की ब्रीडिंग शुरू करने से 15–20 दिन पहले नर और मादा प्रजनक मछलियों को अलग-अलग तालाबों में रखना चाहिए, ताकि ब्रीडिंग प्रक्रिया सफल हो सके।
कृषि से जुड़े सभी निर्णय मौसम को ध्यान में रखकर लेना ज़रूरी है। इसके लिए किसान भारत मौसम विज्ञान विभाग की बहु-जोखिम पूर्व चेतावनी प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं, जिससे समय रहते मौसम की जानकारी लेकर सही कदम उठाए जा सकें।
कुल मिलाकर फरवरी का यह समय फसलों की देखभाल, नई बुवाई की तैयारी और पशुधन सुरक्षा के लिए अहम है। थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर उठाए गए कदम किसानों को नुकसान से बचाकर बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं।
ये भी पढ़ें: इस बीमारी से बर्बाद हो जाती है केले की खेती, वैज्ञानिकों ने खोजा बचाव का जैविक तरीका