खाने के तेल पर बढ़ा भारत का खर्च, 6 महीने में 87 हजार करोड़ रुपये का आयात, बढ़ सकते हैं खाद्य तेल के दाम

Gaon Connection | May 13, 2026, 15:41 IST
भारत का खाद्य तेल आयात बिल 19% बढ़ गया है। आयात की मात्रा भी 13% से अधिक बढ़ी है। बढ़ती वैश्विक कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण यह वृद्धि हुई है। अप्रैल में पाम ऑयल आयात घटा, जबकि सूरजमुखी और सोयाबीन तेल की मांग बढ़ी है।
भारत में बढ़ा खाने के तेल का आयात

भारत का खाद्य तेल आयात बिल लगातार बढ़ता जा रहा है। 2025-26 के ऑयल ईयर (नवंबर-अक्टूबर) के पहले छह महीनों में देश का खाने के तेल का आयात बिल करीब 19% बढ़ गया है। वहीं आयात की मात्रा में भी 13% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ती वैश्विक कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण भारत को अब खाद्य तेल आयात पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत ने 78.15 लाख टन खाद्य तेल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 68.76 लाख टन था। यानी आयात की मात्रा में 13.66% की बढ़ोतरी हुई। SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता के मुताबिक इस दौरान खाद्य तेल आयात का कुल खर्च बढ़कर करीब 87 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 73 हजार करोड़ रुपये था। यानी मूल्य के लिहाज से करीब 19% की बढ़ोतरी हुई है।



अप्रैल में पाम ऑयल आयात घटा

हालांकि अप्रैल महीने में कुल खाद्य तेल आयात बढ़कर 13.07 लाख टन पहुंच गया, लेकिन पाम ऑयल आयात में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में भारत ने 5.10 लाख टन क्रूड पाम ऑयल आयात किया, जबकि मार्च में यह 6.73 लाख टन था। यानी करीब 24% की गिरावट आई। RBD पामोलीन आयात में तो और बड़ी गिरावट देखने को मिली। मार्च में जहां 13,498 टन आयात हुआ था, वहीं अप्रैल में यह घटकर सिर्फ 1,536 टन रह गया। ऑयल की बढ़ती कीमतों और कमजोर मांग के कारण रिफाइनर अब दूसरे तेलों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।



सूरजमुखी और सोयाबीन तेल की मांग बढ़ी

पाम ऑयल महंगा होने के बाद भारत में सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का आयात तेजी से बढ़ा है। अप्रैल में सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर 4.34 लाख टन पहुंच गया, जबकि मार्च में यह 1.96 लाख टन था। इसी तरह सोयाबीन तेल का आयात भी मार्च के 2.87 लाख टन से बढ़कर अप्रैल में 3.60 लाख टन पहुंच गया। बीवी मेहता ने कहा कि फिलहाल घरेलू स्तर पर सरसों की पेराई ज्यादा होने से सप्लाई ठीक बनी हुई है, लेकिन कम स्टॉक के कारण आने वाले महीनों में आयात और बढ़ सकता है।



एक साल में पाम ऑयल की कीमत 15% तक बढ़ी

SEA के मुताबिक अप्रैल 2026 में पाम ऑयल की आयात कीमतें पिछले साल अप्रैल के मुकाबले 14-15% तक बढ़ गईं। वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में 17-22% तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा पिछले एक साल में रुपया डॉलर के मुकाबले 9.2% से ज्यादा कमजोर हुआ है, जिससे आयातकों और रिफाइनर कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।



किन देशों से आया सबसे ज्यादा तेल?

  • नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच:
  • इंडोनेशिया ने भारत को 16.3 लाख टन पाम ऑयल सप्लाई किया
  • मलेशिया से 15.2 लाख टन पाम ऑयल आया
  • अर्जेंटीना से 13.32 लाख टन सोयाबीन तेल आयात हुआ
  • ब्राजील से 4.25 लाख टन सोयाबीन तेल आया
  • रूस ने 8.1 लाख टन और यूक्रेन ने 2.74 लाख टन सूरजमुखी तेल भारत भेजा

नेपाल से भी बढ़ा रिफाइंड तेल आयात

नेपाल से भी भारत में रिफाइंड खाद्य तेल का आयात बढ़ा है। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच नेपाल ने करीब 2.17 लाख टन रिफाइंड तेल भारत को निर्यात किया। इसमें सबसे ज्यादा रिफाइंड सोयाबीन तेल शामिल रहा। मार्च और अप्रैल में भी नेपाल से करीब 63-65 हजार टन खाद्य तेल भारत आया।



आम लोगों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक कीमतें और डॉलर मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले महीनों में खाने के तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर गाँवों और शहरों दोनों में रसोई के बजट पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।

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