ICAR Foundation Day: कृषि अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा नया बल, बढ़ेगा CSR निवेश, 75 से अधिक उद्योगों ने जताई साझेदारी की इच्छा
16 जुलाई को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) अपना 98वाँ स्थापना दिवस मना रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (एजीआईएन) ने नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स में ‘आईसीएआर टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो फ़ॉर कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य आईसीएआर, कॉरपोरेट कंपनियों, उद्योग जगत, परोपकारी संस्थाओं और अन्य हितधारकों के बीच साझेदारी को मज़बूत करना था, ताकि सीएसआर के ज़रिये टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा दिया जा सके। सम्मेलन में आईसीएआर ने ऐसी कृषि तकनीकों और शोध कार्यों को प्रस्तुत किया, जिन्हें सीएसआर परियोजनाओं के माध्यम से बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।
कॉन्क्लेव को उद्योग जगत से व्यापक समर्थन मिला। देशभर की 75 से अधिक कंपनियों के लगभग 150 प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया, जबकि 570 लोग ऑनलाइन जुड़े। यूट्यूब पर कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को 1,600 से अधिक लोगों ने देखा। सम्मेलन के समापन पर कई प्रमुख कंपनियों और सीएसआर संस्थाओं ने आईसीएआर और एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड के साथ सीएसआर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) के तहत मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। इन साझेदारियों का उद्देश्य कृषि तकनीकों के तेज़ी से प्रसार और किसानों की आजीविका को मज़बूत करना है।
जलवायु, मिट्टी, महिला किसान और कृषि कौशल पर रहा फोकस, रोडशो से तैयार हुई साझेदारी की ज़मीन
कॉन्क्लेव में आईसीएआर ने अपने सीएसआर-तैयार तकनीकी पोर्टफोलियो, नवाचारों और बड़े स्तर पर लागू की जा सकने वाली तकनीकों का प्रदर्शन किया। इस वर्ष सम्मेलन में भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना, प्रकृति-आधारित समाधानों और फसल विविधीकरण के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, स्वास्थ्य के लिए कृषि, कृषि कौशल विकास तथा कृषि एवं कृषि विस्तार में महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई। इन क्षेत्रों को टिकाऊ ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिहाज़ से अहम माना गया।
मुख्य सम्मेलन से पहले आईसीएआर ने चार क्षेत्रीय सीएसआर एवं टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो रोडशो आयोजित किए। ये रोडशो 20 जून को हैदराबाद, 23 जून को बेंगलुरु, 1 जुलाई को मुंबई और 7 जुलाई को कोलकाता में हुए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य टिकाऊ कृषि विकास के लिए संभावित सीएसआर साझेदारों की पहचान और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना था। रोडशो में आईसीएआर संस्थानों, उद्योगों, स्टार्टअप, उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और मीडिया के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चारों रोडशो में कुल 500 से अधिक हितधारक जुड़े और कई संस्थाओं ने आईसीएआर के साथ सीएसआर आधारित परियोजनाओं में साझेदारी की इच्छा जताई।
कई बड़ी कंपनियाँ आईसीएआर के साथ मिलकर करेंगी काम, किसानों तक पहुँचेंगी नई तकनीकें
कॉन्क्लेव के समापन पर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (एआईसीएल), एसबीआई फ़ाउंडेशन, यूको बैंक, आईसीआईसीआई फ़ाउंडेशन, बायोवेट प्राइवेट लिमिटेड, फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की), इन्फाह (INFAH), वेंकटेश्वरा हैचरीज़ प्राइवेट लिमिटेड, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड और यस बैंक ने आईसीएआर और एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड के साथ सीएसआर और आरएंडडी के तहत सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।
आईसीएआर के अनुसार, इन रणनीतिक साझेदारियों से कृषि तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाने और उनके व्यावसायीकरण को गति मिलेगी। साथ ही टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा और देशभर के किसानों की आजीविका मज़बूत करने में मदद मिलेगी। सम्मेलन में शोधकर्ताओं, उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं, विकास संगठनों और सीएसआर से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी ने कृषि क्षेत्र में विज्ञान, नवाचार और रणनीतिक साझेदारी के ज़रिये समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल को रेखांकित किया।
क्या बोले शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर CSR कॉन्क्लेव 2026 में उद्योग जगत से किसानों और ग्रामीण भारत के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कंपनियां अपनी कमाई का एक हिस्सा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से कृषि अनुसंधान, किसानों और ग्रामीण विकास पर खर्च करें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कृषि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक शोध का लाभ सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचना चाहिए। महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि CSR केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक जिम्मेदारी है।
शिवराज सिंह चौहान ने जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की गिरती गुणवत्ता, असंतुलित उर्वरक उपयोग और पोषण सुरक्षा जैसी चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए कंपनियों से क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, मृदा स्वास्थ्य, सॉयल हेल्थ कार्ड और टिकाऊ खेती में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, ड्रोन पायलट प्रशिक्षण, कृषि कौशल विकास, एग्री-बिजनेस और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को CSR से जोड़ने की भी सलाह दी। साथ ही महिला किसानों, 'ड्रोन दीदी' और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी और युवाओं के लिए नए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।