ICAR ने बनाया शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप, 120 दिनों तक फलों को बचाने में करेगा मदद; कीटनाशकों पर घटेगी निर्भरता
फलों की खेती करने वाले किसानों के लिए फल मक्खी यानी फ्रूट फ्लाई एक बड़ी चुनौती है। यह कीट आम, अमरूद और अन्य फलों को नुकसान पहुँचाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है। इस समस्या से किसानों को राहत दिलाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत काम करने वाले नेशनल ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चरल इंसेक्ट रिसोर्सेज (NBAIR), बेंगलुरु ने ‘शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ विकसित किया है।
यह ट्रैप पर्यावरण के अनुकूल तकनीक पर आधारित है और फलों की फसलों को नुकसान पहुँचाने वाली फ्रूट फ्लाई के नियंत्रण में मदद कर सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, यह ट्रैप 120 दिनों से अधिक समय तक प्रभावी रहता है और इसे दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता कम करने और सुरक्षित फल उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
कैसे काम करता है शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप?
शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप विशेष आकर्षण तकनीक के ज़रिए फ्रूट फ्लाई को अपनी ओर खींचकर नियंत्रित करता है। यह ट्रैप खासतौर पर बैक्ट्रोसेरा डॉर्सालिस (Bactrocera dorsalis) जैसी फ्रूट फ्लाई प्रजाति के नियंत्रण में प्रभावी पाया गया है। फ्रूट फ्लाई का प्रकोप बढ़ने से फलों में सड़न, गुणवत्ता में कमी और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में यह तकनीक एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती है।
आम और अमरूद समेत कई फलों के लिए उपयोगी
फ्रूट फ्लाई आम, अमरूद और कई अन्य फल फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाने वाले कीटों में शामिल है। इसके हमले से फल समय से पहले गिर सकते हैं और बाजार में उनकी कीमत भी प्रभावित हो सकती है। ICAR के अनुसार, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों में शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। यह तकनीक किसानों को कम रासायनिक इस्तेमाल के साथ बेहतर गुणवत्ता वाले फल उत्पादन में मदद कर सकती है।
IIHR की तकनीक से भी मिल रही फ्रूट फ्लाई से सुरक्षा
फ्रूट फ्लाई नियंत्रण के लिए भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु ने भी मेल एनीहिलेशन टेक्नीक (MAT) आधारित ट्रैप विकसित किया है। इस तकनीक में नर फ्रूट फ्लाई को आकर्षित कर खत्म किया जाता है, जिससे उनकी प्रजनन प्रक्रिया प्रभावित होती है। IIHR के अनुसार, आम के बागों में इस तकनीक के इस्तेमाल से अच्छे परिणाम मिले हैं। बेहतर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 6 से 8 ट्रैप लगाने की सलाह दी जाती है।
फलों की गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाने में मदद
फ्रूट फ्लाई पर नियंत्रण मिलने से फलों की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और किसानों को बाजार में अच्छा मूल्य मिल सकता है। इसके अलावा निर्यात योग्य फलों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सकता है। ऐसी पर्यावरण-अनुकूल तकनीकें किसानों को कीट नियंत्रण के लिए नए विकल्प उपलब्ध कराती हैं और रासायनिक कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल को कम करने में मदद करती हैं।
ICAR ने फल उत्पादक किसानों से फसलों में फ्रूट फ्लाई के प्रभावी नियंत्रण के लिए ऐसी तकनीकों को अपनाने की अपील की है। नई तकनीकों के इस्तेमाल से किसान फलों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ उत्पादन लागत को भी नियंत्रित कर सकते हैं।