UP Academic Calendar: 2026-27 से ICT शिक्षण हुआ अनिवार्य, इन डिजिटल टूल्स से लैस होगी पढ़ाई

Gaon Connection | Apr 04, 2026, 15:12 IST
उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में आगामी सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए प्रत्येक कक्षा में 10 मिनट का ICT शिक्षण अनिवार्य किया जाएगा। इससे बच्चे कम उम्र से ही तकनीक के साथ जुड़कर सीखेंगे।
अब पढ़ाई होगी डिजिटल

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए एक नया अकादमिक कैलेंडर जारी किया है, जो प्रदेश की स्कूली शिक्षा को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कैलेंडर के तहत, कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए हर कक्षा में कम से कम 10 मिनट ICT (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) आधारित शिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही डिजिटल दुनिया से परिचित कराना और उन्हें तकनीक के साथ सहज बनाना है।



ICT शिक्षण का अर्थ



ICT शिक्षण का अर्थ है पढ़ाई में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology) का उपयोग करना। आसान शब्दों में कहें तो जब शिक्षक पढ़ाने के लिए कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट, स्मार्ट बोर्ड, वीडियो या डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे ICT शिक्षण कहा जाता है। इस तरीके में पारंपरिक किताबों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक को जोड़ा जाता है, जिससे पढ़ाई ज्यादा आसान, रोचक और समझने योग्य बनती है। उदाहरण के तौर पर, किसी विषय को वीडियो या एनीमेशन के जरिए समझाना, ऑनलाइन टेस्ट लेना या डिजिटल कंटेंट का उपयोग करना ICT शिक्षण का हिस्सा है। यह न केवल छात्रों की समझ को बेहतर बनाता है, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया के लिए भी तैयार करता है, जो आज के समय में बेहद जरूरी है।



तकनीक से लैस होगी पढ़ाई, किताबों से आगे बढ़ेगी समझ

नई व्यवस्था के अनुसार, अब पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। डिजिटल कंटेंट, स्मार्ट लर्निंग और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करके बच्चों की समझ को और गहरा बनाया जाएगा। ICT के माध्यम से छात्र न केवल विषयों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि उनकी डिजिटल स्किल्स भी विकसित होंगी, जो आज के समय में बहुत जरूरी हैं। साप्ताहिक आकलन, 'मेने सीख लिया' जैसे अभ्यास और परिणामों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था भी शिक्षा को तकनीक से जोड़ने का एक बड़ा कदम है।



अभिभावकों की भागीदारी और संतुलित शिक्षा पर जोर

कैलेंडर में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए अभिभावकों से फोन पर संपर्क किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर घर जाकर भी मुलाकात की जाएगी। स्कूलों में विज्ञान गतिविधियों, खेलकूद प्रतियोगिताओं और विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा को भी संतुलित तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, यह नया अकादमिक कैलेंडर साफ संकेत देता है कि सरकारी स्कूलों में भी शिक्षा का फोकस तेजी से डिजिटल और कौशल आधारित होता जा रहा है, जिसमें ICT की भूमिका सबसे अहम है।

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