IMD बदलेगा हीटवेव घोषित करने के नियम, केरल में रिकॉर्ड गर्मी और उमस के बाद बड़ा फैसला, जानें अभी क्या हैं पैरामीटर
देश में लगातार बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी के बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) अब हीटवेव घोषित करने के नियमों में बदलाव करने जा रहा है। मौसम विभाग का मानना है कि मौजूदा पैरामीटर भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं, खासकर केरल जैसे राज्यों में। IMD और उसके तकनीकी सहयोगी संस्थान जल्द ही हीटवेव घोषित करने के मानकों की समीक्षा करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा नियमों के कारण कई बार गंभीर गर्मी और उमस के बावजूद हीटवेव की चेतावनी जारी नहीं की जा पाती।
केरल में पहली बार दिखा अलग मौसम पैटर्न
रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल केरल में भीषण गर्मी और उमस देखने को मिली। खास बात यह रही कि पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने एंटी-साइक्लोन सिस्टम के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान तैयार करना पड़ा। IMD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दक्षिण भारत के इतने करीब पहले कभी एंटी-साइक्लोन सिस्टम नहीं बना था। आमतौर पर ऐसे सिस्टम उत्तर-पश्चिम भारत में देखने को मिलते हैं।
रात में भी नहीं मिली गर्मी से राहत
अधिकारियों के मुताबिक एंटी-साइक्लोन सिस्टम के कारण हवा नीचे की ओर दबती रही, जिससे गर्म हवा सतह के पास फंसी रही और रात में भी तापमान कम नहीं हो पाया। इसी वजह से केरल में रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से केरल में लगातार गर्मी बढ़ रही है। ऐसे में हीटवेव घोषित करने के नियम बदलने से राज्य में समय पर चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी।
अभी क्या हैं हीटवेव घोषित करने के नियम?
फिलहाल IMD तटीय इलाकों में तब हीटवेव घोषित करता है जब अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो और सामान्य तापमान से 4.5 डिग्री अधिक दर्ज किया जाए। मैदानी इलाकों में यह सीमा 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस तय की गई है। इसके साथ ही किसी राज्य में कम से कम दो मौसम केंद्रों पर ये परिस्थितियां दर्ज होना जरूरी होता है।
केरल में नियम बन रहे परेशानी की वजह
IMD अधिकारियों का कहना है कि केरल में शायद ही कभी दो जगहों पर एक साथ ऐसी परिस्थितियां दर्ज होती हैं। इसके बावजूद राज्य में गंभीर हीट स्ट्रेस की स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों को हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है। इसी कारण अब हीटवेव घोषित करने के मानकों को दोबारा तैयार करने का फैसला लिया गया है। अंतिम फैसला लेने से पहले आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ भी चर्चा की जाएगी।
लगातार बढ़ रहा तापमान, बढ़े हीट स्ट्रोक के मामले
इस गर्मी के मौसम में केरल के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। IMD और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की लगातार चेतावनियों के बावजूद राज्य में हीट स्ट्रोक के कई मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि केरल अब क्लाइमेट चेंज का बड़ा हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। यहां तापमान लगातार बढ़ रहा है और मानसून का पैटर्न भी अनियमित होता जा रहा है।
इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका
IMD ने इस साल सामान्य से कम मानसून का अनुमान भी जताया है। मौसम विभाग के मुताबिक लगातार दूसरे साल एल नीनो की स्थिति बनने की वजह से बारिश प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पुराने पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले वर्षों में गर्मी और उमस की ऐसी स्थितियां और गंभीर हो सकती हैं।