IMD की बड़ी भविष्यवाणी, इस दिन केरल पहुंच सकता है मानसून, 21 साल में केवल एक बार गलत निकला पूर्वानुमान
देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल केरल तट पर 26 मई के आसपास पहुंच सकता है। यह मानसून के सामान्य आगमन की तारीख 1 जून से करीब 6 दिन पहले होगा। हालांकि IMD ने कहा है कि अनुमान में 4 दिन आगे-पीछे का अंतर संभव है। IMD ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि मानसून 16 मई को दक्षिण अंडमान सागर, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है, जबकि इसकी सामान्य तारीख 20 मई मानी जाती है।
अल नीनो की आशंका के बीच अहम माना जा रहा मानसून
इस साल मानसून को लेकर मौसम वैज्ञानिकों की खास नजर बनी हुई है क्योंकि IMD पहले ही जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश की संभावना जता चुका है। इसके पीछे सुपर अल नीनो की आशंका को बड़ा कारण माना जा रहा है। ऐसे में मानसून का समय से पहले पहुंचने का अनुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
पिछले 21 साल में लगभग सही रहे IMD के अनुमान
मौसम विभाग ने कहा कि 2005 से 2025 के बीच केरल में मानसून पहुंचने की तारीख को लेकर उसके “ऑपरेशनल फोरकास्ट” लगभग सही साबित हुए हैं। सिर्फ 2015 में अनुमान वास्तविक तारीख से अलग रहा था। IMD के अनुसार केरल में मानसून की शुरुआत भारतीय मुख्य भूमि में मानसून के प्रवेश का आधिकारिक संकेत मानी जाती है। इसके बाद मानसून धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर बढ़ता है और भीषण गर्मी से राहत मिलने लगती है।
पिछले वर्षों में मानसून कब पहुंचा?
| वर्ष | वास्तविक तारीख | IMD का अनुमान |
|---|---|---|
| 2019 | 8 जून | 6 जून |
| 2020 | 1 जून | 5 जून |
| 2021 | 3 जून | 31 मई |
| 2022 | 29 मई | 27 मई |
| 2023 | 8 जून | 4 जून |
| 2024 | 30 मई | 31 मई |
| 2025 | 24 मई | 27 मई |
किन संकेतों के आधार पर लगाया जाता है अनुमान?
IMD मानसून के आगमन का अनुमान लगाने के लिए कई मौसमीय संकेतकों का इस्तेमाल करता है। इनमें उत्तर-पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान, दक्षिण भारत में प्री-मानसून बारिश, समुद्री हवाएं, ऊपरी और निचले वायुमंडल की हवाओं की दिशा तथा समुद्री विकिरण जैसे कारक शामिल हैं।
किसानों और आम लोगों को राहत की उम्मीद
देश की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर करता है। समय पर बारिश होने से धान, सोयाबीन, कपास और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई बेहतर तरीके से हो पाती है। फिलहाल उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में मानसून के जल्दी आने की संभावना से किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।