बढ़ानी है मिट्टी की उर्वरता या फिर घटानी है खेती की लागत? जानिए 'खेत बचाओ अभियान' में किसानों को मिले कौनसे खेती बचाने के टिप्स

Preeti Nahar | Jun 10, 2026, 16:48 IST
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देश भर में चल रहे"खेत बचाओ अभियान" के तहत, उत्तर प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण, जैव विविधता और टिकाऊ खेती के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती, फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग और कृषि-पशुपालन के समन्वय जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी।

कृषि विज्ञान केंद्र कटिया, सीतापुर और कृषि विभाग की ओर से चलाए जा रहे विकसित कृषि संकल्प अभियान और "खेत बचाओ अभियान" के दसवें दिन जिले के कई गाँवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।



अभियान का मकसद किसानों को मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण, जैव विविधता, खेती की लागत कम करने और टिकाऊ खेती के तरीकों के बारे में जानकारी देना है।



इस दौरान वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने किसानों से सीधे बातचीत कर प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और खेती को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने का संदेश दिया।



हर गाँव में पोषण और मिट्टी की सेहत पर चर्चा

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विकास खंड हरगांव ब्लॉक के रीछिन और भीखपुर गाँव में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने किया। डॉ. रीमा ने कहा कि खेत बचाने का मतलब सिर्फ मिट्टी बचाना नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की भोजन और पोषण सुरक्षा को मजबूत करना भी है।



उन्होंने किसानों और महिलाओं को घर पर पोषण वाटिका लगाने, जैविक खाद अपनाने और कृषि उत्पादों से अतिरिक्त आय बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, इसलिए संतुलित खेती अपनाना जरूरी है।



कीटनाशकों का सोच-समझकर करें इस्तेमाल

एडीओ (पौध संरक्षण) मुस्ताक अहमद ने किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिना जरूरत कीटनाशकों का इस्तेमाल खेतों की जैव विविधता को नुकसान पहुंचाता है। किसानों को सलाह दी गई कि वे कीट और रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करें।



कसमंडा में कृषि और पशुपालन के फायदे बताए गए

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कसमंडा ब्लॉक के मानपारा और कोकनामऊ गाँव में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व पशु विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह ने किया। डॉ. आनंद सिंह ने कहा कि खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने किसानों को गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों के इस्तेमाल को बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि पशुधन केवल कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि खेत की उर्वरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।



फसल अवशेष जलाने से बचने की सलाह

डॉ. आनंद सिंह ने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन अवशेषों का इस्तेमाल पशुओं के चारे और जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती और संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी जानकारी भी दी गई।



बिसवां में मिट्टी की उर्वरता पर हुई चर्चा

बिसवां ब्लॉक के हसनापुर और सलेमपुर गाँव में आयोजित कार्यक्रम में कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह और मृदा वैज्ञानिक डॉ. सचिन प्रताप तोमर ने किसानों को जानकारी दी। डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि खेत बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी, पानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जब तक प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहेंगे, तब तक खेती भी सुरक्षित रहेगी।



मिट्टी परीक्षण पर दिया गया जोर

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डॉ. सचिन प्रताप तोमर ने कहा कि मिट्टी की घटती उर्वरता खेती के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें। साथ ही हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक पदार्थों के इस्तेमाल को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि अच्छी फसल की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी से होती है।



खरीफ फसलों की तैयारी की जानकारी

एसएमएस दीपेश कुमार सिंह ने किसानों को खरीफ सीजन की तैयारियों और खेत प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी। वहीं इफको के एसएफए विमल वर्मा ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और उर्वरकों के सही उपयोग पर जोर दिया।



किसानों से की गई खास अपील

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वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों से फसल अवशेष न जलाने, नियमित रूप से मिट्टी परीक्षण कराने, जल संरक्षण के उपाय अपनाने और जैविक संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उनका कहना था कि खेतों को बचाना सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।



लगातार चल रहे हैं जागरूकता कार्यक्रम

कृषि विज्ञान केंद्र कटिया, सीतापुर के प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि खेत बचाओ अभियान के तहत जिले के अलग-अलग गाँवों में लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों से किसानों में मिट्टी, पानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और टिकाऊ खेती की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

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