सिर्फ़ उत्पादन नहीं अब किसानों की आय बढ़ाने पर देना होगा ज़ोर; प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष ने बताए 4 उपाय

Gaon Connection | Jul 23, 2026, 17:45 IST
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष एस. महेंद्र देव ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में उत्पादन आधारित सोच से आगे बढ़कर किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित नीतियाँ अपनानी होंगी। उन्होंने फसल विविधीकरण, कृषि बाज़ार सुधार, एआई और डिजिटल तकनीक के उपयोग, कृषि प्रसंस्करण, एफपीओ और सहकारिता को मज़बूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।

भारत को कृषि क्षेत्र में अब केवल उत्पादन बढ़ाने की सोच से आगे बढ़कर किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित नीतियाँ अपनानी होंगी। इसके लिए फसल विविधीकरण, कृषि बाज़ार सुधार, खाद्य प्रसंस्करण, नई तकनीकों के इस्तेमाल और छोटे किसानों को संगठित संस्थाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष एस. महेंद्र देव ने कहा कि कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास तभी संभव होगा, जब किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ने के लिए बेहतर आर्थिक अवसर मिलें।



उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के बाद भारत खाद्यान्न की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न, फल, सब्ज़ी, दूध और मत्स्य उत्पादक देशों में शामिल हो चुका है। इसके बावजूद अब सबसे बड़ी चुनौती किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की है। उनका कहना था कि कृषि, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 17 प्रतिशत और रोज़गार में 43 प्रतिशत योगदान देते हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र की मज़बूती से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में भी माँग बढ़ेगी तथा समग्र अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।



आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण और बाज़ार सुधार ज़रूरी

दिल्ली में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (आईसीसी) द्वारा आयोजित कृषि कार्यक्रम में एस. महेंद्र देव ने कहा कि अब कृषि नीति का केंद्र केवल उत्पादन नहीं, बल्कि किसानों की आय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बागवानी, मत्स्य पालन, तिलहन, दलहन और अन्य अधिक मूल्य वाली कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब इन फसलों से किसानों को पारंपरिक धान और गेहूँ की तुलना में बेहतर लाभ मिले।



उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज के बेहतर विपणन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार और छोटे एवं सीमांत किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा सहकारी संस्थाओं से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि बाज़ार सुधारों पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि राज्यों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि कृषि राज्य का विषय है।



तकनीक, एआई और एग्रीस्टैक से बदल सकती है कृषि की तस्वीर

एस. महेंद्र देव ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, सैटेलाइट तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भारतीय कृषि में बड़े बदलाव ला सकती है। उन्होंने जीन एडिटिंग तकनीक और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कृषि अनुसंधान एवं विकास में सरकारी और निजी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई।



उन्होंने कहा कि एग्रीस्टैक और सैटेलाइट आधारित आँकड़ों की मदद से खेत स्तर पर उर्वरकों के उपयोग की बेहतर निगरानी की जा सकती है। वहीं, एआई का उपयोग केवल उत्पादन बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों की माँग का पूर्वानुमान लगाने में भी किया जा सकता है। ब्लॉकचेन तकनीक से उच्च मूल्य वाली फसलों और निर्यात होने वाले कृषि उत्पादों की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नई तकनीकों का लाभ देश के हर किसान तक पहुँचे।



एफपीओ, सहकारिता और कृषि प्रसंस्करण से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

एस. महेंद्र देव ने कहा कि देश के लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग के हैं। ऐसे किसानों की आय बढ़ाने के लिए एफपीओ, सहकारी समितियाँ, प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (पीएसीएस) और अन्य किसान संस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से काम करने से किसानों को बेहतर बाज़ार, आधुनिक तकनीक और आवश्यक संसाधनों तक आसान पहुँच मिल सकती है।



उन्होंने कृषि प्रसंस्करण को ग्रामीण औद्योगीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि इससे गाँवों में रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने क्लस्टर आधारित कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के विकास, कृषि निर्यात बढ़ाने, भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पादों को बढ़ावा देने और वैश्विक गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण, वितरण और उपभोग को एक साथ जोड़ने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा विभिन्न मंत्रालयों के बीच तालमेल बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

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