भारत और न्यूजीलैंड ने FTA पर किया हस्ताक्षर, ड्यूटी-फ्री एक्सेस के साथ कृषि सेक्टर को सुरक्षा, इंडिया ने इन उत्पादों पर नहीं दी छूट
करीब एक दशक की लंबी बातचीत के बाद भारत और न्यूजीलैंड ने आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन कर दिया है। ‘once-in-a-generation’ बताए जा रहे इस समझौते से दोनों देशों के बीच सामान और सर्विसेज के ट्रेड, इन्वेस्टमेंट फ्लो और लेबर मोबिलिटी के नए रास्ते खुलेंगे। सरकार का मानना है कि यह डील जहां एक्सपोर्ट को नई रफ्तार देगी, वहीं कृषि जैसे संवेदनशील सेक्टर में संतुलन बनाए रखते हुए किसानों के हितों की भी रक्षा करेगी।
10 साल की बातचीत के बाद डील, 20 चैप्टर में तय हुए नियम
इस एग्रीमेंट को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के उनके काउंटरपार्ट टॉड मैक्ले की मौजूदगी में औपचारिक रूप दिया गया। इसकी बातचीत 2010 में शुरू हुई थी, 2015 में रुक गई और फिर मार्च 2025 में दोबारा शुरू होकर दिसंबर 2025 में पूरी हुई। इस तरह यह भारत के सबसे तेजी से पूरे हुए FTAs में शामिल हो गया। समझौते में 20 चैप्टर हैं, जिनमें गुड्स, सर्विसेज, रूल्स ऑफ ओरिजिन, कस्टम्स, तकनीकी बाधाएं और विवाद निपटान जैसे अहम प्रावधान शामिल हैं।
ड्यूटी-फ्री एक्सेस और सर्विस सेक्टर को बड़ा फायदा
FTA के तहत भारत को न्यूजीलैंड में अपने सभी एक्सपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल गया है। इसमें टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर भी शामिल हैं। साथ ही सर्विस सेक्टर—जैसे आईटी, शिक्षा, वित्त, पर्यटन और कंस्ट्रक्शन—में भी भारत को बड़ा फायदा मिलेगा। एक नया टेम्पररी वर्क वीजा सिस्टम भी बनाया गया है, जिससे 5,000 तक भारतीय प्रोफेशनल न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम कर सकेंगे।
कृषि सेक्टर: संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा, संतुलित रणनीति
समझौते में कृषि सेक्टर को लेकर खास सावधानी बरती गई है। भारत ने डेयरी, चीनी और कुछ अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों को पूरी तरह बाहर रखा है, ताकि छोटे किसानों पर असर न पड़े। वहीं सेब, कीवी और मनुका हनी जैसे उत्पादों पर टैरिफ-रेट कोटा, न्यूनतम आयात कीमत और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। यह एक संतुलित रणनीति को दिखाता है, जिसमें बाजार तक पहुंच और घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाए रखा गया है। इस पर पीयूष गोयल ने भी कहा कि जहां कुछ आयात होंगे, वहीं भारतीय किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा।
इन्वेस्टमेंट और न्यूजीलैंड को मिलने वाले फायदे
इस एग्रीमेंट से भारत में अगले 15 साल में 20 बिलियन डॉलर तक FDI आने की उम्मीद है। वहीं न्यूजीलैंड को भारत में अपने 54% से ज्यादा एक्सपोर्ट—जैसे शीप मीट, ऊन, कोयला और फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स—पर तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जबकि बाकी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ धीरे-धीरे कम होंगे। 2024 में दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड करीब 2.4 बिलियन डॉलर रहा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें तेजी से बढ़ती भारतीय मार्केट तक बेहतर पहुंच मिलेगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे।