₹20,000 करोड़ की लागत से रूस में बनेगा भारत का यूरिया प्लांट, 2 साल में होगा तैयार, 20 लाख टन होगा उत्पादन

Apr 28, 2026, 12:05 IST
Image credit : Gaon Connection Network
किसानों के लिए अच्छी खबर है। भारत और रूस मिलकर एक बड़ा यूरिया प्लांट लगा रहे हैं। यह प्लांट दो साल में तैयार होगा और हर साल 20 लाख टन यूरिया का उत्पादन करेगा। सारी यूरिया भारत आएगी। इससे किसानों को समय पर सस्ती खाद मिलेगी। देश की आयात पर निर्भरता भी कम होगी।
फसल में यूरिया डालता हुआ किसान

भारत में खाद की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत और रूस मिलकर एक मेगा यूरिया प्लांट बना रहे हैं, जो अगले दो साल में तैयार हो सकता है। इस प्रोजेक्ट से हर साल 20 लाख टन यूरिया का उत्पादन होगा, जिसे पूरी तरह भारत लाया जाएगा। इससे किसानों को समय पर और सस्ती खाद मिल सकेगी, साथ ही देश की आयात पर निर्भरता भी कम होगी।



दो साल में तैयार होगा 2 मिलियन टन क्षमता वाला प्लांट

इंडियन पोटाश लिमिटेड (IP) के मैनेजिंग डायरेक्टर पीएस गहलौत के अनुसार, रूस में प्रस्तावित यूरिया प्लांट की प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट पिछले हफ्ते जमा कर दी गई है। यह प्लांट हर साल 2 मिलियन टन यूरिया उत्पादन करेगा और अगले दो वर्षों में तैयार होने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) शामिल हैं, जो जल्द ही रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लेंगे।



रूस के टोगलियाटी में बनेगा प्लांट, पूरा उत्पादन भारत आएगा


यह प्लांट रूस के समारा क्षेत्र के टोगलियाटी में स्थापित किया जाएगा। यह 50:50 का जॉइंट वेंचर होगा, जिसमें रूस की कंपनी Uralchem और भारत की IP, RCF व NFL साझेदार हैं। Uralchem अमोनिया प्लांट में करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि भारतीय कंपनियां यूरिया यूनिट के लिए IP और RCF 4,500-4,500 करोड़ और NFL 1,000 करोड़ रुपये निवेश करेंगी। इस प्लांट में बनने वाला पूरा यूरिया भारत में घरेलू खपत के लिए आयात किया जाएगा।



आयात निर्भरता घटाने और सप्लाई सुरक्षित करने की पहल


उद्योग के एक अधिकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 मिलियन टन से ज्यादा उर्वरकों का आयात किया, जिसमें 10 मिलियन टन यूरिया शामिल था। देश में कुल यूरिया खपत करीब 40 मिलियन टन है, जिसमें से लगभग 30 मिलियन टन घरेलू उत्पादन से आता है। ऐसे में यह जॉइंट वेंचर भारत के लिए एक सुनिश्चित सप्लाई स्रोत के रूप में काम करेगा और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच राहत देगा।



पिछले साल हुआ था MoU, वैश्विक संकट से बढ़ी जरूरत


दिसंबर 2025 में भारत और रूस की कंपनियों ने इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता नई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुआ था। हाल के समय में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण यूएई, कुवैत, ईरान, सऊदी अरब, कतर और बहरीन जैसे छह प्रमुख उत्पादन केंद्र प्रभावित हुए हैं, जो वैश्विक यूरिया व्यापार का 30-40% हिस्सा रखते हैं। इससे सप्लाई में दिक्कत और कीमतों में तेजी आई है।



कीमतों में उछाल, खरीफ से पहले 2.5 मिलियन टन आयात मंजूर


सरकार ने खरीफ सीजन से पहले सप्लाई बढ़ाने के लिए अगले दो महीनों में 2.5 मिलियन टन यूरिया आयात को मंजूरी दी है, जो रूस, अल्जीरिया, नाइजीरिया और ओमान से आएगा। इंडियन पोटाश को इस आयात की जिम्मेदारी दी गई है। सप्लायर्स द्वारा दी गई कीमतें 935 से 959 डॉलर प्रति टन के बीच हैं, जो फरवरी के मुकाबले काफी ज्यादा हैं।


भारत हर साल करीब 65-70 मिलियन टन उर्वरकों—यूरिया, DAP और NPK—का उपयोग करता है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई आयात किया जाता है। यह नई परियोजना भविष्य में इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Tags:
  • India Russia urea plant
  • urea production India Russia
  • fertilizer supply India
  • farmer fertilizer relief
  • urea import reduction India
  • India Russia joint venture
  • fertilizer project 20000 crore
  • urea supply security India
  • agriculture input cost India
  • mega urea plant Russia