दो साल में तीन गुना बढ़ा भारत का इलायची निर्यात, 4300 करोड़ रुपये से ज़्यादा पहुंची कमाई; दुनिया में बढ़ी भारतीय मसाले की मांग
दुनिया भर में भारतीय मसालों की मांग लगातार बढ़ रही है और इसका सबसे बड़ा फायदा इलायची (Cardamom) के निर्यात में देखने को मिला है। पिछले दो वर्षों में भारत से साबुत इलायची (Whole Cardamom) का निर्यात मूल्य के लिहाज से तीन गुना से अधिक बढ़ गया है। बढ़ती वैश्विक मांग, बेहतर गुणवत्ता और भारतीय इलायची की ख़ास सुगंध के कारण विदेशी खरीदार बड़ी मात्रा में इसकी खरीद कर रहे हैं। इसका सीधा फायदा देश के मसाला निर्यात और किसानों को मिल रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत से साबुत इलायची का निर्यात 436.8 मिलियन डॉलर (करीब 4,300 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। यह 2023-24 में 131.9 मिलियन डॉलर था। यानी दो वर्षों में निर्यात मूल्य तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया। वहीं निर्यात की मात्रा भी दोगुने से अधिक बढ़ी है, जो भारतीय इलायची की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।
दो साल में दोगुनी से अधिक हुई निर्यात मात्रा, इन देशों में सबसे ज़्यादा मांग
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में भारत ने 16,399 टन साबुत इलायची का निर्यात किया, जबकि 2024-25 में यह 7,674 टन और 2023-24 में 7,083 टन था। पीटीआई के अनुसार, निर्यात में आई इस तेज़ बढ़ोतरी की मुख्य वजह दुनिया भर में प्रीमियम मसालों की बढ़ती मांग, बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन और भारतीय इलायची की सुगंध, शुद्धता तथा गुणवत्ता के प्रति विदेशी खरीदारों का बढ़ता भरोसा है। भारत से सबसे अधिक इलायची का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को हुआ, जहां 135.22 मिलियन डॉलर की इलायची भेजी गई। इसके बाद सऊदी अरब (125.16 मिलियन डॉलर), बांग्लादेश (47.71 मिलियन डॉलर), कुवैत (20 मिलियन डॉलर), इराक (13.71 मिलियन डॉलर) और मलेशिया (8.48 मिलियन डॉलर) प्रमुख खरीदार रहे। इसके अलावा नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, चीन, मिस्र और ईरान भी भारत से बड़ी मात्रा में इलायची का आयात करते हैं।
भारत में कहां होती है इलायची की खेती?
भारत में मुख्य रूप से इलायची की दो किस्मों की खेती होती है छोटी इलायची (Small Cardamom) और बड़ी इलायची (Large Cardamom)। छोटी इलायची की खेती मुख्य रूप से दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट (Western Ghats) में की जाती है। केरल इसका सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 56 से 58 प्रतिशत हिस्सा देता है। केरल के इडुक्की, वायनाड और पलक्कड़ इसके प्रमुख उत्पादक ज़िले हैं।
केरल के बाद कर्नाटक के कूर्ग, हासन और चिकमंगलूर तथा तमिलनाडु के नीलगिरि, पलानी और पुलनी पहाड़ी क्षेत्रों में भी बड़ी मात्रा में छोटी इलायची की खेती की जाती है। वहीं बड़ी इलायची, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं और मसाला मिश्रणों में अधिक होता है, मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत के ऊंचाई वाले राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में उगाई जाती है।