भारत में एथेनॉल उत्पादन का ट्रेंड बदला, गन्ना नहीं अब इससे बन रहा सबसे ज़्यादा एथेनॉल, एआईडीए रिपोर्ट में सामने आए आँकड़े

Gaon Connection | Jul 09, 2026, 17:55 IST
भारत में एथेनॉल उत्पादन का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार, जून 2026 तक देश की लगभग 67 प्रतिशत एथेनॉल आपूर्ति अनाज आधारित स्रोतों से हुई, जिसमें मक्का सबसे बड़ा फ़ीडस्टॉक बनकर उभरा है। गन्ने पर निर्भरता कम होने से एथेनॉल उद्योग अधिक संतुलित और मज़बूत बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को नए बाज़ार मिलेंगे, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और सरकार के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भी गति मिलेगी।

भारत का एथेनॉल उद्योग तेज़ी से बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। जहाँ पहले एथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों पर निर्भर था, वहीं अब अनाज आधारित कच्चे माल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार, मौजूदा समय में देश की कुल एथेनॉल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा अनाज से तैयार हो रहा है, जिसमें मक्का सबसे प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे माल की विविधता और जैव ईंधन उत्पादन को मज़बूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।



सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति और जैव ईंधन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का असर अब साफ़ दिखाई देने लगा है। एआईडीए का कहना है कि गन्ने पर निर्भरता कम होने से उत्पादन व्यवस्था अधिक संतुलित बन रही है। साथ ही किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं, क्योंकि मक्का और अन्य खाद्यान्नों की माँग बढ़ने से उनकी फसलों को अतिरिक्त बाज़ार मिलने की संभावना है।



एआईडीए के आँकड़े: अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन में बढ़त, मक्का सबसे आगे

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (एआईडीए) के जून 2026 के आँकड़ों के अनुसार, देश में एथेनॉल की कुल आपूर्ति का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों से आया, जबकि गन्ने आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत रही। एआईडीए के मुताबिक़, अनाज से लगभग 480 करोड़ लीटर और गन्ने आधारित स्रोतों से लगभग 238 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई।



एआईडीए के अनुसार, मक्का सबसे बड़ा एथेनॉल फ़ीडस्टॉक बनकर उभरा है और इससे लगभग 258 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। भारतीय खाद्य निगम (एफ़सीआई) के अतिरिक्त खाद्यान्नों से 177 करोड़ लीटर, गन्ने के रस से 144 करोड़ लीटर, बी-हेवी शीरे से 82 करोड़ लीटर और क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से लगभग 45 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया। एआईडीए का मानना है कि अनाज आधारित कच्चे माल का बढ़ता उपयोग एथेनॉल उद्योग को किसी एक फसल पर निर्भर रहने से बचा रहा है। इससे मौसम संबंधी जोखिम और उत्पादन में उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा।



एथेनॉल आपूर्ति में बढ़ोतरी, लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेज़ी

एआईडीए के अनुसार, एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 717 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है, जो 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंधित लक्ष्य का लगभग 68 प्रतिशत है। संगठन का कहना है कि यह उत्पादन क्षमता में वृद्धि और नीति समर्थन का परिणाम है। एआईडीए के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का जैव ईंधन कार्यक्रम अब विविध कच्चे माल पर आधारित मज़बूत व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, मक्का के साथ-साथ अतिरिक्त खाद्यान्न और गन्ने आधारित स्रोतों की बढ़ती भागीदारी देश की ऊर्जा सुरक्षा और एथेनॉल आपूर्ति को अधिक स्थिर बना रही है।



वहीं, एआईडीए की उप महानिदेशक भारती बालाजी के अनुसार, सरकारी नीतियों के कारण अब डिस्टिलरी इकाइयों के पास विभिन्न प्रकार के कच्चे माल का उपयोग करने की अधिक सुविधा है। इससे उत्पादन व्यवस्था अधिक लचीली बनी है और भविष्य में एथेनॉल क्षेत्र के विस्तार को गति मिलेगी।



किसानों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए नए अवसर

एआईडीए का मानना है कि मक्का और अन्य खाद्यान्नों की बढ़ती माँग से किसानों को अपनी उपज के लिए अतिरिक्त बाज़ार मिलेगा और कृषि में विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, डिस्टिलरी उद्योग भी अलग-अलग कच्चे माल का उपयोग कर उत्पादन को अधिक सुरक्षित और संतुलित बना सकेगा। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के विस्तार, फ़्लेक्स-फ़्यूल वाहनों को बढ़ावा और नई जैव ईंधन तकनीकों पर ज़ोर के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि नीति समर्थन, बुनियादी ढाँचे में निवेश और अनुसंधान से भारत का जैव ईंधन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और अधिक मज़बूत तथा आत्मनिर्भर बन सकता है।

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