PM Modi: "संकट के समय में सरकार की पहल, खाद्य सप्लाई को सुनिश्चित करना है प्राथमिकता"
वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच खेती और खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत के किसानों ने देश के अन्न भंडार भरे रखे हैं और सरकार हर हाल में खेती को प्रभावित नहीं होने देगी। पीएम ने भरोसा दिलाया कि देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है और आने वाले खरीफ सीजन की तैयारी पूरी मजबूती से की जा रही है।
खाद में आत्मनिर्भरता की ओर बड़े कदम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में देश ने खाद उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में तेजी से काम किया है। सरकार ने छह नए यूरिया प्लांट शुरू किए हैं, जिनसे सालाना 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इसके साथ ही डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों का घरेलू उत्पादन भी करीब 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए खाद के स्रोतों को भी विविध बनाया गया है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता से होने वाले जोखिम को कम किया जा सके।
आधुनिक और टिकाऊ खेती पर जोर
खेती को भविष्य के लिए मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए सरकार नई तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। ‘मेड इन इंडिया’ नैनो यूरिया किसानों के लिए एक सस्ता और प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे लागत घटे और जमीन की सेहत सुधरे। पीएम कुसुम योजना के तहत 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप किसानों को दिए जा चुके हैं, जिससे डीजल पर निर्भरता कम हुई है और खेती की लागत में कमी आई है।
ऊर्जा क्षेत्र से खेती को मजबूती
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मजबूत ऊर्जा व्यवस्था का सीधा फायदा खेती को मिलता है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद देश के पावर प्लांट्स के पास पर्याप्त कोयला स्टॉक मौजूद है। भारत ने लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, और पावर जनरेशन से लेकर सप्लाई तक लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि किसानों को निर्बाध बिजली मिल सके।
रिन्यूएबल एनर्जी से बढ़ रही ताकत
सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए हैं। आज देश की कुल इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी का लगभग आधा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से आता है, जो 250 गीगावाट के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है। पिछले 11 वर्षों में सोलर पावर क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट तक पहुंच गई है। करीब 40 लाख रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं, जिससे आम लोगों और किसानों दोनों को लाभ मिल रहा है। इसके अलावा गोवर्धन योजना के तहत 200 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट भी संचालित हो रहे हैं।
भविष्य की ऊर्जा तैयारी
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार न्यूक्लियर और हाइड्रो पावर पर भी ध्यान दे रही है। शांति एक्ट के माध्यम से न्यूक्लियर एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं स्मॉल हाइड्रो पावर डेवलपमेंट स्कीम को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अगले पाँच वर्षों में 1500 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी जाएगी।
किसानों को संकट से बचाने की तैयारी
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि वैश्विक संकटों के बावजूद सरकार खेती, खाद और ऊर्जा, तीनों मोर्चों पर पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है। इन कदमों का उद्देश्य किसानों पर बोझ कम करना, उत्पादन बढ़ाना और देश की खाद्य सुरक्षा को हर हाल में मजबूत बनाए रखना है।