इंसानों और जंगली जानवरों के टकराव को रोकने की नई पहल, सरकार ने लॉन्च किया राष्ट्रीय पोर्टल, कोयंबटूर में खुला सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस

Umang | Jul 10, 2026, 13:29 IST
देश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस) का उद्घाटन किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जिससे देशभर में ऐसी घटनाओं के डेटा प्रबंधन, निगरानी और बेहतर समाधान में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के ज़रिए इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही बाघ, तेंदुए और हाथियों से जुड़े संघर्षों के लिए नई रणनीति तैयार करने पर भी ज़ोर दिया गया है।

देश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस) का उद्घाटन किया। यह केंद्र वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) और सलीम अली सेंटर फ़ॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (सैकॉन) के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसके साथ ही सरकार ने राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया, जिससे देशभर में ऐसी घटनाओं की निगरानी और बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।



सरकार का कहना है कि जंगलों के सिकुड़ने, आबादी बढ़ने और मानव गतिविधियों के विस्तार की वजह से इंसानों और जंगली जानवरों का आमना-सामना लगातार बढ़ रहा है। इसका असर सिर्फ़ लोगों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की फसलों, संपत्ति और वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जा रही है।



हाथी, बाघ और तेंदुए से जुड़े मामलों के लिए बनेगी नई रणनीति

भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े शोध, नई तकनीकों, नीति निर्माण, अधिकारियों के प्रशिक्षण और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा। उन्होंने अधिकारियों से बाघ अभयारण्यों के बाहर घूमने वाले बाघों, तेंदुओं और हाथियों से जुड़े मामलों के लिए अलग और प्रभावी नीति तैयार करने को कहा। उनके अनुसार, हर क्षेत्र और हर वन्यजीव की प्रकृति अलग होती है, इसलिए समाधान भी क्षेत्र और प्रजाति के अनुसार तैयार किए जाने चाहिए।



केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि शहरों और गाँवों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत है, ताकि लोग जंगली जानवरों के सामने आने पर घबराने के बजाय सही तरीक़े से स्थिति का सामना कर सकें। उन्होंने राज्यों के वन विभागों से अपील की कि वे केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से रोकथाम के उपाय करें और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करें।



राष्ट्रीय पोर्टल से मिलेगी मदद, तकनीक और लोगों की भागीदारी पर रहेगा ज़ोर

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया। यह डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म देशभर में होने वाली मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का डेटा एकत्र करने, जानकारी साझा करने और राज्यों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा। इस अवसर पर 'भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन' शीर्षक से पहली रिपोर्ट भी जारी की गई जिसमें देश में बढ़ते संघर्ष, उसके रुझानों और नई चुनौतियों का विस्तृत आकलन किया गया है।



केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में मिली सफलता के कारण कई इलाक़ों में इंसानों और जंगली जानवरों का संपर्क बढ़ा है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि नया उत्कृष्टता केंद्र अधिकारियों और स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण देने, आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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