दुनिया के सीफूड बाज़ार में बड़ा दांव खेलेगा भारत, 5 साल में निर्यात तीन गुना करने की तैयारी, सरकार ने रखा 30 अरब डॉलर का टारगेट
झींगा उत्पादन में दुनिया के बड़े देशों में शामिल भारत अब समुद्री खाद्य निर्यात में भी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश के सीफूड निर्यात को मौजूदा 8.5 अरब डॉलर से बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार और वैल्यू एडेड उत्पादों पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि भारतीय समुद्री उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक कीमत और पहचान हासिल कर सकें।
राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के मछली और झींगा उत्पादों को दुनिया के हर बड़े बाजार तक पहुंचाने का समय आ गया है। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि कच्चे उत्पादों के बजाय प्रोसेस्ड और ब्रांडेड सीफूड निर्यात पर ध्यान दिया जाए, जिससे निर्यातकों और मछुआरों दोनों को अधिक लाभ मिल सके।
पांच साल में 30 अरब डॉलर का लक्ष्य
गोयल ने कहा कि भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 2013-14 के 5 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 8.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अब लक्ष्य इसे अगले पांच वर्षों में 30 अरब डॉलर तक ले जाने का है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। इन समझौतों से भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
गुणवत्ता और वैल्यू एडिशन पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाने से लक्ष्य हासिल नहीं होगा। भारतीय उद्योग को गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित करने और वैल्यू एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा, "भारत की मछली और झींगा को दुनिया भर में पहुंचाइए। कच्चे झींगा के आयात पर निर्भरता घटाइए और वैल्यू एडेड उत्पादों के जरिए वैश्विक ब्रांड बनाइए।"
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात
वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात रिकॉर्ड 73,890.46 करोड़ रुपये यानी 8.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया। अमेरिका और चीन भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं, जबकि फ्रोजन श्रिम्प देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की स्थिति मजबूत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के सवाल पर गोयल ने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों का बेहतर प्रबंधन किया है। उन्होंने कहा कि कई देशों में ईंधन उपलब्धता तक संकट का विषय बन गई है, लेकिन भारत में न तो आपूर्ति बाधित हुई और न ही आम लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तेल और उर्वरक कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव का बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है ताकि किसानों और कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
किसानों को मिल रही भारी सब्सिडी
गोयल ने बताया कि जिन उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 3,000 रुपये है, उन्हें किसानों को करीब 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है।
वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत
केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत को वैश्विक मत्स्य निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि छोटे मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए वैल्यू एडिशन और निर्यात ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय मत्स्य बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय जल्द ही आंध्र प्रदेश में स्थापित किया जा सकता है। आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक और समुद्री खाद्य निर्यातक राज्य है तथा झींगा निर्यात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 66 प्रतिशत है।
एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार देश में हवाई अड्डों की संख्या बढ़ाकर 350 से अधिक करने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही अधिक कार्गो एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे ताकि कृषि और समुद्री उत्पादों का निर्यात तेज हो सके। उन्होंने "वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट" की तर्ज पर "वन एयरपोर्ट, वन प्रोडक्ट" मॉडल विकसित करने की भी बात कही।