BRICS मंच से भारत का संदेश, छोटे किसान होंगे भविष्य की नींव, शिवराज सिंह बोले- महिला और युवा शक्ति से बदलेगी खेती की तस्वीर
जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और खाद्य सुरक्षा की वैश्विक चुनौतियों के बीच ब्रिक्स देशों ने छोटे किसानों को कृषि विकास की धुरी बनाने पर जोर दिया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में शुरू हुए ब्रिक्स कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा का भविष्य छोटे और सीमांत किसानों को मजबूत बनाने से जुड़ा है। उन्होंने सदस्य देशों से कृषि क्षेत्र की साझा चुनौतियों से निपटने, खाद्य उत्पादन बढ़ाने और टिकाऊ कृषि विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत के करीब 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। ऐसे किसानों को मजबूत बनाना समावेशी विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि यदि छोटे किसानों की आय और क्षमता बढ़ेगी तो खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कृषि क्षेत्र में 4.5% की औसत वृद्धि
केंद्रीय मंत्री ने भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश का कुल खाद्य उत्पादन बढ़कर लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन और बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। वहीं मछली उत्पादन भी 19 मिलियन टन के पार पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित कर रहा है और यह उपलब्धियां किसानों की मेहनत तथा सरकार की नीतियों का परिणाम हैं।
43% कार्यबल कृषि से जुड़ा
चौहान ने कहा कि भारत में करीब 43 प्रतिशत कार्यबल कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि उन्नत बीज, सिंचाई, आधुनिक तकनीक और किसान सहायता कार्यक्रमों के जरिए किसानों को लगातार समर्थन दिया जा रहा है।
किसान सम्मान निधि और फसल बीमा का जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत करोड़ों किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिल रही है। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं।
प्राकृतिक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और सेवाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट्स के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
कृषि बदलाव में महिलाओं की अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बताया कि देशभर में करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहलों को ग्रामीण भारत में तकनीकी बदलाव का उदाहरण बताया।
युवाओं को कृषि से जोड़ने की जरूरत
चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इससे खेती अधिक आधुनिक, लाभकारी और आकर्षक बन रही है।
BRICS देशों से सहयोग बढ़ाने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने सदस्य देशों से छोटे किसानों के सशक्तिकरण, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि विकास के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग से वैश्विक कृषि को नई दिशा दी जा सकती है।