2026-27 में चीनी उत्पादन 12% बढ़कर 33.6 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान, बेहतर मानसून और पैदावार का असर
भारत में 2026-27 सीजन में चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर मौसम, बढ़े हुए गन्ना रकबे और रिकवरी में सुधार के चलते देश का कुल चीनी उत्पादन 12 प्रतिशत बढ़कर लगभग 33.6 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा सीजन के लगभग 30 मिलियन टन उत्पादन से काफी अधिक होगा, जिससे देश में आपूर्ति की स्थिति मजबूत होने की संभावना है।
बेहतर मानसून और स्वस्थ फसल से उत्पादन में बढ़ोतरी
USDA के फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस (FAS) के अनुसार यह अनुमान महाराष्ट्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में मार्च 2026 में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसमें फसल की अच्छी स्थिति और अनुकूल मौसम देखा गया। लगातार दो वर्षों (2024 और 2025) में अच्छे मानसून के कारण भूजल और सतही जल स्तर में सुधार हुआ, जिससे गन्ने जैसी पानी-आधारित फसल को पर्याप्त नमी मिली और उत्पादन में बढ़ोतरी संभव हुई।
गन्ना क्षेत्र और उत्पादन दोनों में इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 सीजन में गन्ने का रकबा बढ़कर 5.9 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है, जो करीब 2 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह गन्ना उत्पादन भी 2 प्रतिशत बढ़कर 463 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में बेहतर जल उपलब्धता के कारण किसानों ने गन्ने की खेती बढ़ाई है। साथ ही चीनी रिकवरी दर भी 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो बेहतर मिट्टी की नमी और फसल विकास का परिणाम है।
एथेनॉल नीति से बढ़ा प्रोत्साहन
सरकार की फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) व्यवस्था और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत एथेनॉल खरीद की गारंटी ने भी गन्ना खेती को बढ़ावा दिया है। इससे किसान कपास और दलहन जैसी अन्य फसलों की तुलना में गन्ने की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। वहीं खांडसारी और गुड़ का उत्पादन भी करीब 3 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, क्योंकि उपभोक्ता पारंपरिक और कम प्रोसेस्ड उत्पादों की ओर रुझान दिखा रहे हैं।
मांग से ज्यादा होगा उत्पादन
रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 में देश में चीनी की खपत लगभग 31 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो मौजूदा साल से 3 प्रतिशत अधिक है। हालांकि पहली बार दो वर्षों के बाद घरेलू उत्पादन खपत से ज्यादा रहेगा, जिससे बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी। वहीं 2025-26 सीजन में भारी बारिश के कारण उत्पादन घटकर 30 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो शुरुआती अनुमान से कम है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले 7 प्रतिशत अधिक है। उद्योग संगठन ISMA के अनुसार चालू सीजन में अब तक उत्पादन 27.52 मिलियन टन तक पहुंच चुका है।