होर्मुज़ संकट का असर: भारत के 60 हजार टन बासमती चावल की खेप पर मंडराया खतरा, 5-10% तक गिर सकते हैं दाम
ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को शिपिंग के लिए बंद करने की घोषणा का असर भारत के बासमती चावल और चाय निर्यात पर पड़ने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि पश्चिम एशिया को होने वाली आपूर्ति प्रभावित होने से बासमती चावल की कीमतों में 5-10% तक गिरावट आ सकती है।
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि अमेरिका-ईरान के अंतरिम शांति समझौते की घोषणा के बाद निर्यातकों ने मध्य-पूर्व के लिए बासमती चावल की खरीद बढ़ा दी थी, जिससे कीमतों में 15-20% की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने की घोषणा के बाद बाज़ार का रुख बदल सकता है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
60 हज़ार टन बासमती चावल रास्ते में
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 60,000 टन बासमती चावल इस समय पश्चिम एशियाई देशों के लिए भेजा जा चुका है और परिवहन में है। भारत के बासमती चावल के प्रमुख निर्यात बाज़ारों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन शामिल हैं। ये देश भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 50% हिस्सा लेते हैं। भारत में हर वर्ष लगभग 72 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन होता है, जिसमें से करीब 60 लाख टन का निर्यात किया जाता है।
चाय उद्योग पर भी संकट के बादल
पश्चिम एशिया भारतीय चाय का भी एक बड़ा निर्यात बाज़ार है। इस क्षेत्र में भारतीय सेकंड फ्लश प्रीमियम ऑर्थोडॉक्स चाय की अच्छी माँग रहती है। आमतौर पर मई के अंत से ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं और जून से शिपमेंट शुरू होता है। एशियन टी एंड एक्सपोर्ट्स के निदेशक मोहित अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2025 में भारत का चाय निर्यात रिकॉर्ड 28.5 करोड़ किलोग्राम तक पहुँचा था, लेकिन मध्य-पूर्व संकट ने इस उद्योग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भारत से निर्यात होने वाली लगभग 50% चाय मध्य-पूर्वी देशों को जाती है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अवरोध और लाल सागर मार्ग पर बढ़े मालभाड़े के कारण चाय निर्यात लगभग ठहर गया है।
निर्यातकों की बढ़ी चिंता
निर्यातकों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो बासमती चावल और चाय दोनों के निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। साथ ही वैश्विक बाज़ार में भारतीय उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।