अनियमित मानसून और बढ़ती लागत से मंहगे हुए अंडे-चिकन, मुर्गी पालकों की बढ़ी चिंता
देश में मौसम का बदलता मिजाज अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर मुर्गी पालन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक बनी भीषण गर्मी, समय पर राहत नहीं देने वाला मानसून और पशु आहार की बढ़ती कीमतों ने अंडे और चिकन के उत्पादन को प्रभावित किया है। नतीजा यह है कि पिछले कुछ सप्ताहों में कई शहरों में इनके दाम बढ़ गए हैं। इससे एक ओर कुक्कुट पालकों की लागत बढ़ी है तो दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
पोल्ट्री उत्पादन पूरी तरह मौसम पर निर्भर नहीं होता, लेकिन लगातार ऊँचे तापमान और अनियमित बारिश जैसी परिस्थितियां पक्षियों के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता पर सीधा असर डालती हैं। ऐसे में उत्पादन घटने पर बाजार में आपूर्ति कम होती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं।
मौसम की मार से प्रभावित हुआ मुर्गी पालन का उत्पादन
लंबे समय तक अधिक तापमान रहने से मुर्गियां सामान्य मात्रा में दाना नहीं खा पातीं। शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए वे अधिक पानी पीती हैं, जिससे अंडा उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं ब्रॉयलर मुर्गियों का वजन बढ़ने की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है। कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक, हाल के महीनों में कई क्षेत्रों में अंडा उत्पादन में 5 से 7 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि चूजों की मृत्यु दर 7 से 10 प्रतिशत तक बढ़ी। उत्तर भारत के कई राज्यों के साथ महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में इसका असर अधिक देखा गया।
कुक्कुट पालन में सबसे बड़ा खर्च पशु आहार पर होता है। पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, उत्पादन लागत का करीब 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल फ़ीड पर खर्च होता है। मक्का और सोयाबीन खली की बढ़ती कीमतों ने किसानों की लागत और बढ़ा दी है।इसके अलावा गर्मी के दौरान पोल्ट्री शेड को ठंडा रखने के लिए पंखे, फॉगर्स और कूलिंग सिस्टम का लगातार इस्तेमाल करना पड़ा। पानी और दवाओं पर भी अतिरिक्त खर्च हुआ। इन सभी कारणों ने छोटे और मध्यम कुक्कुट पालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया।
बाजार में बढ़े अंडे और चिकन के दाम
उत्पादन प्रभावित होने का असर अब बाजार में भी दिखाई दे रहा है। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के अनुसार, 22 जुलाई को पुणे में थोक बाजार में अंडों का भाव 760 रुपये प्रति 100 अंडे तक पहुँच गया। कई शहरों में अंडे 110 से 120 रुपये प्रति दर्जन तक बिक रहे हैं। मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बाजारों में भी अंडों का थोक भाव लगभग 7.5 रुपये प्रति अंडा दर्ज किया गया। चिकन की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि उत्पादन कम होने से बाजार में आपूर्ति पहले जैसी नहीं रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जुलाई की शुरुआत में कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया था। बाद में कई राज्यों में मानसून सक्रिय हुआ, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बारिश शुरू हो जाने से उत्पादन तुरंत सामान्य नहीं हो जाता। अंडा देने वाली मुर्गियों और ब्रॉयलर पक्षियों को पूरी क्षमता से उत्पादन में लौटने में समय लगता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव आने वाले समय में मुर्गी पालन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। बढ़ता तापमान, अनियमित और वर्षा उत्पादन और लागत दोनों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में बेहतर शेड प्रबंधन, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और मौसम के अनुसार पालन की तकनीकों को अपनाना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। मुर्गी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों परिवारों की आय इससे जुड़ी है। ऐसे में मौसम की मार और बढ़ती लागत का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसकी झलक बाजार में भी दिखाई देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहता है और उत्पादन धीरे-धीरे पटरी पर लौटता है, तभी आने वाले समय में अंडे और चिकन की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।