Jan Aushadhi Diwas: बाजार से 50-90% सस्ती मिलती हैं दवाइयाँ, इसलिए खास है जन औषधि दिवस
भारत में इलाज का खर्च बढ़ने की एक बड़ी वजह महंगी दवाइयाँ भी हैं। कई बार मरीज डॉक्टर की फीस तो दे देता है, लेकिन दवाइयों पर ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है। इसी समस्या को कम करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू की, जिसके तहत देशभर में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। हर साल 7 मार्च को जन औषधि दिवस मनाकर लोगों को सस्ती जेनेरिक दवाइयों के बारे में जागरूक किया जाता है।
क्या है जन औषधि दिवस?
जन औषधि दिवस का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि कम कीमत में भी अच्छी और असरदार दवाइयाँ मिल सकती हैं। इस दिन देशभर में जन औषधि केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना के बारे में जान सकें और सस्ती दवाइयों का फायदा उठा सकें। सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के तहत देश के अलग-अलग शहरों, कस्बों और गाँवों में जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। यहाँ मिलने वाली दवाइयाँ वही होती हैं जो आम मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं, लेकिन ये जेनेरिक दवाइयाँ होती हैं इसलिए इनकी कीमत काफी कम होती है।
क्यों जरूरी है यह योजना?
भारत में स्वास्थ्य खर्च का बड़ा हिस्सा दवाइयों पर खर्च होता है। खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए महंगी दवाइयाँ खरीदना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जन औषधि केंद्र लोगों को राहत देने का काम कर रहे हैं। इन केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाइयों से लगभग 50 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों, बुजुर्गों और कम आय वाले परिवारों को इससे काफी फायदा मिलता है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में और ज्यादा जन औषधि केंद्र खोले जाएं, ताकि लोगों को अपने घर के पास ही सस्ती दवाइयां मिल सकें।
कितनी और कैसी दवाइयाँ मिलती हैं?
जन औषधि केंद्रों पर आज करीब 1800 से ज्यादा तरह की दवाइयाँ और 200 से अधिक सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध हैं। इनमें रोजमर्रा की बीमारियों से लेकर गंभीर बीमारियों तक की दवाइयाँ शामिल हैं।
- बुखार और दर्द की दवाइयाँ
- सर्दी-खांसी और एलर्जी की दवाइयाँ
- डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ
- दिल की बीमारी की दवाइयाँ
- एंटीबायोटिक दवाइयाँ
- महिलाओं के लिए सस्ते सैनिटरी पैड
- सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरण
सरकार का कहना है कि इन दवाइयों की गुणवत्ता भी तय मानकों के अनुसार जांची जाती है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और असरदार दवाइयाँ मिल सकें।
डेटा चार्ट: जन औषधि और बाजार की दवाइयाों के दाम
| दवा | जन औषधि कीमत | बाजार कीमत |
| पैंटोप्राजोल 40 mg | ₹11 | ₹180 तक |
| एटोरवास्टेटिन 10 mg | ₹5 | ₹25-30 |
| अमोक्सिसिलिन 500 mg | ₹33 | ₹100 से ज्यादा |
गाँव और छोटे शहरों के लिए राहत
गाँव और छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए यह योजना खास मायने रखती है। अक्सर वहाँ बड़े मेडिकल स्टोर नहीं होते और दवाइयाँ महंगी मिलती हैं। ऐसे में अगर पास में जन औषधि केंद्र हो तो मरीज कम कीमत में जरूरी दवाइयां खरीद सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अब आने वाले वर्षों में हजारों नए जन औषधि केंद्र खोलने की योजना बना रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सस्ती दवाइयों की सुविधा पहुंच सके।