Gaon Se: औरतें के साथ ने बदला भविष्य, कर्नाटक की इन महिलाओं ने मिलकर बनाया बीज बैंक, बचा रहीं विरासत
कर्नाटका में बीवी फातिमा Self Help Group किसानों को बेहतर खेती करने की प्रेरणा दे रहा है और कोशिश कर रहा है कि उनको अलग अलग तरीकों से आमदनी बढ़ाने के नए तरीके सिखाए जाएं। यह उस तरह की कोशिश है जो भारत के कई हिस्सों में किसानों को बेहतर जिंदगी दे रही है। कर्नाटका में लगभग 5000 किसान इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। इसमें बीज बैंक, Millets को उगाना और अन्य तरह की training भी शामिल है। एक खूबसूरत बात यह है कि यह Self Help Group महिलाओं द्वारा संचालित है।
कैसे बना बीवी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह?
कभी ये महिलाएँ घर की चार दीवारी से बाहर निकलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाती थीं। किसी काम के लिए, किसी फैसले के लिए पहले पति या ससुराल वालों की इजाजत लेनी पड़ती थी। पर एक दिन एक महिला ने अपने मन की आवाज सुनी और सोचा अगर हम सब साथ आएँ तो शायद हमें कोई नहीं रोक सकेगा। उस एक सोच ने जन्म दिया बीवी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह को। एक ऐसा समूह जिसने गांव की औरतों को सिर्फ जोड़ा नहीं जगाया। जगाया आत्मविश्वास, साहस और अपने होने की पहचान। बीवी जान मोला सब हले मणि के पास न कोई अनुभव था, न साधन, लेकिन एक भरोसा था हम कर सकते हैं।
बीवी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बीबीजान मौलासब हलेमणि बताती हैं, "अन-educated लोगों की कोई पहचान नहीं रहती है। इसके लिए उनको लेकर हम आगे जाना है। हमारे लोगों को बाहर लाना है, घर से बाहर लाना है। हमारे समाज में क्या चल रहा है, उसके बारे में पता करना है। समाज में हमें भी खुद एक व्यवस्था में चलना है। इसलिए हमने Self Help Group को start किया है।"
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लड़ीं गाँव की महिलाएं
जब एक NGO के लोग गाँव आए तो उन्होंने महिलाओं को संगठन बनाने का विचार दिया। शुरुआत में कई पुरुषों ने विरोध किया। बीवी जान के पति ने भी कहा यह सब बेकार है। लेकिन बीवी जान ने जवाब दिया, अगर हमें अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना है तो हमें खुद कुछ करना होगा। धीरे धीरे दस महिलाएं जुड़ी। बैठकें होने लगीं। निर्णय मिलकर लिए जाने लगे। और पहली बार गांव में महिलाएं सिर्फ सुनने नहीं, बोलने और निर्णय लेने लगीं।
बीबीजान कहती हैं, "हम यहाँ पर काम करके हमारे बच्चों को education भी देना है। हमारी जिंदगी तो चली गई है। चालीस साल चल रहे हैं। पचास साल चल रहे हैं हमारे Self Help Group के member के। आगे हमारे बच्चों की जिंदगी भी इसी तरह नहीं चली जानी चाहिए। इसके लिए हम, हमारे बच्चों की पढ़ाई के लिए, हमारा आर्थिक सुधारने के लिए, दूसरे लोगों को compare करें तो हम भी उनके level पर रहना है। इसके लिए हमने Self Help Group को बनाया है।"
सभी महिलाओं ने मिलकर शुरू किया बीज बैंक
अब वे किसानों से फसल कटाई के समय quality check करके millet खरीदती हैं। पहले सादे packet में बिक्री होती थी। अब सुंदर label लगे होते हैं। फिर उन्होंने शुरू किया बीज bank। 500 किलो little millet के बीज किसानों को दिए। शर्त बस इतनी थी फसल के बाद बीज लौटाना होगा, ताकि कोई और किसान भी उम्मीद बो सके। अब वे मोटे अनाजों के बीज पूरे राज्य में भेजती हैं। बीवी जान का मानना है कि वह सिर्फ बीज नहीं बांटती बल्कि उम्मीद बांटती हैं।
घर परिवार ने दिया साथ
सैनाज़बी हलेमणि बताती हैं, "हमारा लक्ष्य था कि भविष्य में हमारे किसान multi cropping करें। हमारे देसी variety बीज गायब हो रहे थे। पहले हमारे दादा सभी दालों को उगाते थे। Mix cropping करने वाले हमारे घर को क्या ही चाहिए। जब से समूह वाले आए हैं, अब तो कोई कुछ नहीं कहता। पहले हमारे पति भी टोकाटाकी नहीं करते थे। अब बाहर जाने से भी नहीं रोकते। कहते हैं जाओ, समूह तो है ही तुम्हारे साथ। अगर रात में एक बजे भी लौटे तो भी कुछ नहीं कहते। उनके साथ जाने देते हैं। यही बदलाव आया है जिंदगी में। पहले तो चार दीवारी में कैद थे।"
संयुक्त राष्ट्र कि तरफ से मिला Ecuador Initiative Award
2022 में उनके समूह को मिला संयुक्त राष्ट्र का Ecuador Initiative Award, जिसे लोग Biodiversity Nobel कहते हैं। यह सम्मान सिर्फ बीवी जान या उनके समूह का नहीं। यह हर उस महिला का है जिसने डर के पार जाकर सपने देखे। और यह कहानी सिर्फ Millets या व्यापार की नहीं। यह कहानी है हिम्मत, एकता और आत्मनिर्भरता की। वो कहानी जो बताती है कि जब औरतें साथ आती हैं तो पूरा भविष्य बदल जाता है। गांव से।