केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन तेज़, पदयात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए अमित भटनागर, सड़कों पर उतरे ग्रामीण

Gaon Connection | May 08, 2026, 13:26 IST
बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध तेज हो गया है। प्रस्तावित पदयात्रा से पहले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को गिरफ्तार किया गया है। आंदोलनकारी इसे आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं। प्रभावित किसान और आदिवासी परिवार मुआवजा, पुनर्वास और पारदर्शी सर्वे की मांग कर रहे हैं। परियोजना से हजारों परिवारों के विस्थापन की आशंका है।
एक आंदोलन में अमित भटनागर

केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में संघर्ष और तेज हो गया है। प्रस्तावित ‘न्याय अधिकार पदयात्रा’ शुरू होने से ठीक पहले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को मध्य प्रदेश की पन्ना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आंदोलनकारी इसे आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं। प्रभावित किसान और आदिवासी परिवार लंबे समय से मुआवजा, पुनर्वास, ग्राम सभा अधिकार और पारदर्शी सर्वे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।



पदयात्रा से पहले गिरफ्तारी


जय किसान संगठन के बैनर तले 8 मई को न्याय अधिकार पदयात्रा निकाली जानी थी लेकिन उससे पहले ही अमित भटनागर को गिरफ्तार कर लिया गया। भटनागर ने फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि बिजावर थाना पुलिस उन्हें कुपिया से गिरफ्तार कर पन्ना कोतवाली ले जा रही है। आंदोलन में शामिल लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने आधी रात को कार्रवाई कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की। अमित भटनागर लंबे समय से केन-बेतवा परियोजना और उससे जुड़ी सिंचाई योजनाओं के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि प्रभावित गांवों में जमीन अधिग्रहण, सर्वे और ग्राम सभा की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।



क्या है केन-बेतवा परियोजना और क्यों हो रहा विरोध

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ परियोजना है। इसके तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के भीतर दौधन बांध बनाया जा रहा है ताकि बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। परियोजना के तहत करीब 9 हजार हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आएगी, जिसमें बड़ी मात्रा में वन भूमि भी शामिल है। कई गांव सीधे प्रभावित होंगे और हजारों परिवारों के विस्थापन की आशंका है। इसके अलावा मझगाय और रुंझ सिंचाई परियोजनाओं को लेकर भी विरोध जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पूरी जानकारी दिए बिना परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। विश्रामगंज समेत कई गांवों में ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव पारित कर परियोजना का विरोध भी किया है।



फरवरी से जारी है आंदोलन

फरवरी में दौधन और पलकोहा गांव की महिलाओं ने मुआवजा और सर्वे में गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। इसके बाद मार्च में हजारों किसान और आदिवासी पन्ना कलेक्ट्रेट तक मार्च करते हुए पहुंचे। इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और लाठीचार्ज के आरोप भी लगे। आंदोलन धीरे-धीरे जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल और प्रतीकात्मक चिता आंदोलन तक पहुंच गया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन कई बार लिखित आश्वासन दे चुका है, लेकिन जमीन पर समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ।



मुआवजा और ग्राम सभा अधिकार सबसे बड़ा मुद्दा

प्रभावित ग्रामीणों की मांग है कि प्रत्येक परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और परिवार के सभी वयस्क सदस्यों, बेटियों समेत, को अलग परिवार इकाई मानकर पुनर्वास का लाभ मिले। महिलाएं मुआवजे में अलग हिस्सेदारी की भी मांग कर रही हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने मुआवजा बढ़ाने और शिकायतों की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति बनाई है। सरकार का दावा है कि परियोजना से हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी, लेकिन आंदोलनकारी अब भी ग्राम सभा रिकॉर्ड, पारदर्शी सर्वे और उचित पुनर्वास की मांग पर अड़े हुए हैं।

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