केरल के मछुआरों के लिए 1418 करोड़ की योजनाएं, सरकार ने बताए कई कदम

Gaon Connection | Feb 11, 2026, 14:41 IST
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केंद्र सरकार ने केरल में मछुआरों की हालत सुधारने और मछली पालन के विकास के लिए पिछले पांच सालों में 1418.51 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नावों से लेकर बंदरगाहों के विकास तक कई काम किए जा रहे हैं। सरकार ने मछलियों की घटती संख्या को बचाने के लिए हर साल 61 दिन मछली पकड़ने पर रोक भी लगाई है।

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केंद्र सरकार ने केरल में मछुआरों की आजीविका मजबूत करने और मछली पालन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं। मत्स्य पालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पिछले पांच सालों और चालू वर्ष में केरल को 1418.51 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ लालन सिंह ने आज लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने मछुआरों की मदद के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं।



गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की सुविधा

सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए 20 नावों को मंजूरी दी है। इसके अलावा समुद्र में मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए तट के पास 42 कृत्रिम चट्टानें बनाई जा रही हैं। ये चट्टानें मछलियों के रहने की जगह बनती हैं और उनकी संख्या बढ़ाने में मदद करती हैं। सरकार ने मछुआरों को दूसरे तरीकों से भी कमाई का मौका दिया है। इसके तहत 1140 बीवाल्व (सीपी जैसे जीव) की खेती, 780 बायोफ्लोक इकाइयां और 708 री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) यानी आधुनिक मछली पालन की इकाइयों को मंजूरी दी गई है। ये सभी काम मछुआरों को साल भर आमदनी देने में मदद करेंगे।



मछली पकड़ने की रोक के दौरान मदद

हर साल जब मछली पकड़ने पर रोक लगती है, उस दौरान मछुआरों को आर्थिक दिक्कत होती है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने 1,71,033 मछुआरों को रोक के दौरान आजीविका सहायता देने की मंजूरी दी है। यह राशि उन्हें मछली पकड़ने की रोक के समय में काम आती है। केरल में तटीय इलाकों में मछली पालन को मजबूत करने के लिए 9 एकीकृत आधुनिक तटीय मछुआरा गांव, 6 जलवायु लचीले तटीय गांव, 10 मत्स्य सेवा केंद्र और 222 सागर मित्रों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। ये सभी पहल मछुआरों को बेहतर सुविधाएं देने और उनके गांवों का विकास करने के लिए हैं।



मछलियों की संख्या बचाने के लिए रोक

सरकार ने मछलियों की घटती संख्या को बचाने के लिए हर साल भारत के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने पर 61 दिनों की रोक लगाई है। पूर्वी तट पर यह रोक 15 अप्रैल से 14 जून तक और पश्चिमी तट पर 1 जून से 31 जुलाई तक लागू होती है। इस दौरान मछलियां प्रजनन करती हैं और उनकी संख्या बढ़ती है। मत्स्य पालन विभाग ने ऐसे तरीकों पर रोक लगा दी है जो मछलियों और समुद्री जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसमें बैल या पेयर ट्रॉलिंग (एक साथ दो नावों से जाल खींचना) और कृत्रिम रोशनी या एलईडी लाइट से मछली पकड़ना शामिल है। केरल समेत तटीय राज्यों ने भी अपने क्षेत्रों में मछली पकड़ने के जाल के आकार, मछलियों के न्यूनतम कानूनी आकार जैसे नियम बनाए हैं।



मिट्टी तेल की सुविधा

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मछुआरों को खाना पकाने, रोशनी और मछली पकड़ने के काम के लिए मिट्टी तेल दिया जाता है। 1 मार्च 2020 से पूरे देश में पीडीएस मिट्टी तेल की कीमत सरकार द्वारा नियंत्रित है और इसमें कोई अतिरिक्त वसूली नहीं की जा रही है। खनन मंत्रालय ने बताया कि समुद्र में किसी भी तरह के खनन या विकास कार्य में पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। अपतटीय क्षेत्र खनिज और विकास अधिनियम, 2002 में ऐसे प्रावधान हैं जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर किसी भी बुरे प्रभाव को रोकते हैं।



बंदरगाह और बाजार का विकास

पीएमएमएसवाई योजना के तहत मछुआरों के लिए सुरक्षित बंदरगाह और बर्फ भंडारण की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। केरल में पिछले पांच सालों में 7 मछली पकड़ने के बंदरगाहों का विस्तार या सुधार, 6 मौजूदा बंदरगाहों की सफाई, 16 बर्फ के कारखाने और शीतागार, मछली ले जाने के लिए 468 वाहन, 2 थोक मछली बाजार, 5 खुदरा बाजार, 90 मछली की दुकानें, 77 जीवित मछली बेचने के केंद्र और 10 मूल्य वर्धित उद्यम इकाइयों को मंजूरी दी गई है। ये सभी कदम मछुआरों को बेहतर सुविधाएं देने, मछलियों को बचाने और मछली पालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में हैं। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से न केवल मछुआरों की आय बढ़ेगी बल्कि समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी होगा।

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