गलत आहार से पशुओं को हो सकती है कीटोसिस बीमारी, एक ही जगह के लगाने लगते हैं चक्कर, जानें लक्षण और बचाव के तरीके

Preeti Nahar | Jun 16, 2026, 13:06 IST
जून के महीने में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा हैष कभी बहुत अधिक गर्मी तो कभी बारिश आ जाती है। ऐसे में जो किसान दुधारू पशु रखते हैं उनको अपने पशुओं के चारे में सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि ख़राब चारा खाने से पशुओं में कीटोसिस नामक बीमारी हो जाती है। जानिए इस तरह की बीमारी में पशु में किस तरह के लक्षण देखे जाते हैं और उनके रोकथाम के तरीके क्या है ये भी जानिए।

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में एक गाय लगातार सात दिनों तक एक ही जगह गोल-गोल घूमने लगी थी, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल होने लगी। लोगों ने इसे दैवीय चमत्कार माना और गाय की पूजा शुरू कर दी। लेकिन पशु चिकित्सकों के जांच में पाया कि गाय को एक तरह की बीमारी थी, जो एक तरह की मानसिक बीमारी थी जो बैक्टीरिया से होने वाली संक्रमण के कारण फैली थी। इसी तरह कई बार खराब चारे के कारण भी पशुओं में एक ही जगह पर बार-बार चक्कर लगाने जैसी समस्या देखी जाती है।



इस तरह की बीमारियों से पशुओं को बचाने के लिए और पशुओं की अच्छी सेहत के साथ बेहतर दूध उत्पादन के लिए सही आहार देना बेहद जरूरी होता है। कई बार ज्यादा दूध देने वाली गायों और भैंसों को संतुलित आहार नहीं मिलने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इन्हीं में से एक बीमारी है कीटोसिस (Ketosis), जो खासतौर पर अधिक दूध देने वाले पशुओं में देखने को मिलती है।



Image credit : Gaon Connection Network

कीटोसिस बीमारी आमतौर पर गाय, भैंस के ब्याने के बाद के शुरुआती दिनों में होती है। जब पशु के शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती तो शरीर में कीटोन तत्वों की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे पशु की सेहत और दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है। समय पर पहचान और सही देखभाल से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।



क्या है कीटोसिस बीमारी?

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कीटोसिस पशुओं में होने वाली एक चयापचय (Metabolic) बीमारी है। यह तब होती है जब पशु को आहार से पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती और शरीर अपनी ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए जमा वसा का इस्तेमाल करने लगता है। वसा के टूटने से शरीर में कीटोन नामक तत्व बनने लगते हैं, जिसकी अधिक मात्रा पशु के लिए नुकसान पैदा कर सकती है।



किन पशुओं में ज्यादा होती है समस्या?

यह बीमारी खासतौर पर उन गायों और भैंसों में ज्यादा देखने को मिलती है जो अधिक मात्रा में दूध देती हैं। ब्याने के बाद शुरुआती 2-3 हफ्तों में पशुओं को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। अगर इस दौरान संतुलित आहार नहीं मिलता तो कीटोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है।



कीटोसिस के लक्षण

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कीटोसिस बीमारी होने पर पशु में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं। सबसे आम लक्षणों में दूध उत्पादन में अचानक कमी आना, भूख कम लगना या खाना छोड़ देना, शरीर का वजन कम होना और कमजोरी व सुस्ती शामिल हैं। इसके अलावा पशु के मुंह से एसीटोन जैसी गंध आ सकती है। कई बार पशु कम गोबर करता है, पाचन संबंधी समस्या दिखाई देती है और उसके व्यवहार में भी बदलाव नजर आ सकता है।



शारीरिक बदलाव भी देखे गए जैसे-



- पशुओं में कूबड़ निकलने जैसी समस्या आती है।



- कई बार पशु उत्तेजित और आक्रमक भी हो सकते हैं।



- शरीर को बार-बार चाटना, सिर और नाक को दबाना, बार-बार दांत का कटकटाना, आवाज करना, चाल में अनियमितता के साथ-साथ लड़खड़ाना, वृत आकार में धूमने लगना याफिर कई बार पशु खड़े-खड़े गिर जाना जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।



कीटोसिस से बचाव कैसे करें?

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इस बीमारी से बचने के लिए पशुओं को खासतौर पर ब्याने के बाद पर्याप्त ऊर्जा वाला संतुलित आहार देना चाहिए।



  1. आहार में अचानक ज्यादा बदलाव करने से बचना चाहिए और पशु की जरूरत के अनुसार हरा चारा, सूखा चारा और दाना उपलब्ध कराना जरूरी है।
  2. इसके साथ ही मिनरल मिक्सचर और जरूरी पोषक तत्वों का ध्यान रखना चाहिए।
  3. पशु के वजन और दूध उत्पादन की नियमित निगरानी करने से भी बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचाना जा सकता है और समय पर उपचार किया जा सकता है।

बीमारी होने पर क्या करें?

अगर पशु में कीटोसिस के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार और आहार में बदलाव करके पशु को जल्द स्वस्थ किया जा सकता है। संतुलित आहार और सही देखभाल से कीटोसिस जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है और पशुओं का दूध उत्पादन भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है। ये सभी जानकारी पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा दी गई है.

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