खरीफ़ सीज़न ने बढ़ाई उर्वरकों की खपत, यूरिया रहा किसानों की पहली पसंद, जानें कितनी हुई बिक्री

Gaon Connection | Aug 03, 2026, 11:32 IST
जुलाई में मानसून सुधरने और खरीफ़ बुवाई में तेज़ी आने से देश में उर्वरकों की माँग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। 17 जुलाई तक 41.09 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हो चुकी, जिसमें यूरिया की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। धान, मक्का और कपास की बुवाई में सुधार के साथ अगस्त में भी उर्वरकों की माँग बढ़ने की संभावना जताई गई है। हालाँकि अप्रैल-जून तिमाही में बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत कम रही, लेकिन बेहतर वर्षा से कृषि गतिविधियों और उर्वरक खपत में फिर से रफ़्तार लौट आई है।

मानसून की रफ़्तार तेज़ होने और खरीफ़ फ़सलों की बुवाई में आई गति के साथ देश में उर्वरकों की माँग में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। मई और जून के दौरान कमज़ोर वर्षा के कारण बुवाई की रफ़्तार धीमी पड़ गई थी, लेकिन जुलाई में बारिश सामान्य होने के बाद खेतों में गतिविधियाँ तेज़ हुईं, जिसका सीधा असर उर्वरकों की बिक्री पर दिखाई दिया। जुलाई के पहले पखवाड़े में ही कुल अनुमानित मासिक माँग का आधे से अधिक हिस्सा बिक चुका है, जिससे आने वाले दिनों में माँग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।



बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, उर्वरक बिक्री के आँकड़े यह भी दर्शाते हैं कि किसानों की पहली पसंद अब भी सब्सिडी वाला यूरिया ही बना हुआ है। सरकार संतुलित पोषण के लिए विभिन्न उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है, लेकिन वास्तविक खपत में यूरिया का दबदबा बरकरार है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में सुधरे मानसून और अगस्त में सामान्य से बेहतर वर्षा के अनुमान के कारण खरीफ़ सीज़न के दौरान उर्वरकों की खपत और बढ़ सकती है।



जुलाई में बिक्री ने पकड़ी रफ़्तार

जुलाई महीने के लिए चार प्रमुख उर्वरकों की कुल अनुमानित माँग 74.28 लाख टन आँकी गई थी। 17 जुलाई तक ही 41.09 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हो चुकी थी, जो कुल अनुमानित माँग के आधे से अधिक के बराबर है। इनमें यूरिया की बिक्री 25.86 लाख टन रही, जो इसकी अनुमानित मासिक माँग 41.67 लाख टन का 62 प्रतिशत से अधिक है। वहीं डाय-अमोनियम फ़ॉस्फ़ेट (डीएपी) की बिक्री 5.74 लाख टन, म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (एमओपी) की 1.07 लाख टन तथा कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री 8.42 लाख टन दर्ज की गई।



बेहतर बारिश से खरीफ़ बुवाई में सुधार

जुलाई में मानसून सक्रिय होने के बाद धान, मक्का और कपास जैसी प्रमुख खरीफ़ फ़सलों की बुवाई में तेज़ सुधार दर्ज किया गया। 31 जुलाई तक धान की बुवाई में कमी घटकर 2 प्रतिशत रह गई, जो 10 जुलाई को 9 प्रतिशत थी। इसी प्रकार कपास में बुवाई का अंतर 15 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत और मक्का में 20 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गया। जुलाई के अंत तक कुल खरीफ़ बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 3 प्रतिशत से भी कम पीछे रही। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि अगस्त में भी वर्षा सामान्य या उससे अधिक रहती है, तो उर्वरकों की माँग में और वृद्धि देखने को मिल सकती है।



पहली तिमाही में रही गिरावट, अगस्त से उम्मीदें

हालाँकि जुलाई में माँग में सुधार देखने को मिला, लेकिन अप्रैल से जून की पहली तिमाही के दौरान उर्वरकों की कुल बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत कम रही। इस अवधि में चार प्रमुख उर्वरकों की बिक्री 121.19 लाख टन से घटकर 115 लाख टन रह गई। यूरिया, एमओपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई, जबकि डीएपी की बिक्री लगभग स्थिर रही।



जानकारों के अनुसार अप्रैल में असामान्य रूप से अधिक बिक्री के बाद सरकार ने कुछ राज्यों में एग्रीस्टैक से उर्वरक वितरण को जोड़ने जैसे क़दम उठाए, जिससे अतिरिक्त ख़रीद पर अंकुश लगा। इसके अलावा जून में सामान्य से 35 प्रतिशत कम वर्षा होने के कारण खरीफ़ बुवाई प्रभावित हुई और उर्वरकों की माँग भी घटी। जुलाई में बेहतर मानसून ने खेती और उर्वरकों की खपत दोनों को नई गति दी।

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