कम बारिश के बावजूद यूपी में खरीफ बुआई 95% पूरी, रबी के लिए ई-लॉटरी से मिलेंगे बीज, सरकार का दावा- खाद की कमी नहीं
उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई लगभग तय लक्ष्य तक पहुँच गई है। राज्य सरकार का दावा है कि समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई की व्यवस्था होने से इस बार खरीफ सीजन में 110 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले करीब 107 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। यह कुल लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत है। पिछले वर्ष 103 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 100 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी।
बुधवार को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि कम बारिश और सुपर अल नीनो की आशंका के बावजूद सरकार ने किसानों को समय पर बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधन उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि खरीफ के बाद अब रबी सीजन की तैयारियाँ भी शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए प्रमाणित बीज वितरण, कृषि यंत्रों पर अनुदान और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पोर्टल भी खोल दिए गए हैं, जहाँ किसानों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
खरीफ बुआई लक्ष्य के करीब, कम बारिश के बीच बीज वितरण पर ज़ोर
कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन में 50 प्रतिशत अनुदान पर 1.73 लाख कुंतल से अधिक बीज वितरित किए गए। दलहन, तिलहन, मूंगफली, सोयाबीन और तिल जैसी फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। सरकार ने 6.13 लाख से अधिक किसानों को 16,449 कुंतल मुफ्त मिनी किट उपलब्ध कराए, जबकि 1.23 लाख कुंतल से अधिक बीज अनुदान पर वितरित किए गए। उन्होंने कहा कि दलहन, तिलहन और मोटे अनाज के बीजों का बड़े पैमाने पर वितरण कर किसानों को कम वर्षा की स्थिति में भी खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कम बारिश को देखते हुए तोरिया पर फोकस, रबी के लिए खुला पोर्टल
सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि 28 जुलाई तक प्रदेश में औसत से लगभग 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 11 जिलों में 40 से 60 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई, जबकि 13 जिलों में स्थिति इससे भी अधिक गंभीर रही। इसे देखते हुए सरकार ने सितंबर में अल्प अवधि वाली तोरिया फसल को बढ़ावा देने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि 1,000 कुंतल तोरिया बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 600 कुंतल मुफ्त मिनी किट और 400 कुंतल अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल खोल दिया गया है और 17 अगस्त के बाद ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन होगा। रबी सीजन के लिए भी 10 जुलाई से पंजीकरण शुरू हो चुका है। सितंबर के पहले सप्ताह में ई-लॉटरी के बाद किसानों को प्रमाणित बीज वितरित किए जाएंगे। इस वर्ष 7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के 36,475 कुंतल मुफ्त मिनी किट पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि यंत्रों पर अनुदान, 25900 मशीनें मिलेंगी ई-लॉटरी से
कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि यंत्रों पर अनुदान योजना के तहत पोर्टल 20 जुलाई से खुल चुका है और 10 अगस्त को ई-लॉटरी निकाली जाएगी। इसके तहत फार्म मशीनरी बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर और व्यक्तिगत कृषि यंत्रों सहित कुल 25,900 कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब तक 41,762 किसान आवेदन कर चुके हैं। फार्म मशीनरी बैंक पर 80 प्रतिशत तक और कस्टम हायरिंग सेंटर पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सभी लाभार्थियों का चयन पारदर्शी ई-लॉटरी प्रक्रिया से किया जाएगा।
खाद की कमी नहीं, सपा सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक: कृषि मंत्री
कृषि मंत्री ने कहा कि एक अप्रैल से 28 जुलाई तक प्रदेश में 57.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 28.88 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। लगभग इतनी ही मात्रा अभी भी उपलब्ध है। उनके अनुसार यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और प्रदेश के किसी भी ब्लॉक में उर्वरकों की कमी नहीं है।
उन्होंने बताया कि पहले जहाँ करीब 1,500 सहकारी समितियों के माध्यम से खाद का वितरण होता था, वहीं अब 7,000 समितियों के ज़रिये किसानों तक उर्वरक पहुँचाया जा रहा है। जुलाई महीने में ही सहकारी समितियों ने 3.22 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और 1.07 लाख मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया है।
इस दौरान कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में प्रदेश में 84.98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण हुआ था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 118 लाख मीट्रिक टन हो गया। उनके अनुसार मौजूदा सरकार किसानों को पिछली सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध करा रही है। साथ ही उन्होंने किसानों से समय पर पंजीकरण कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।