कमज़ोर शुरुआत के बाद रफ़्तार पकड़ रहा मानसून, जुलाई में खरीफ़ की खेती को मिल सकता है सहारा, ICICI बैंक ने जताई उम्मीद
जून में कमजोर शुरुआत और कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश के कारण खरीफ़ सीज़न की बुवाई पर असर पड़ा है। देशभर में अब तक सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसके चलते धान, दलहन और मोटे अनाज जैसी प्रमुख खरीफ़ फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में काफी पीछे चल रही है। हालांकि जुलाई में मानसून की गतिविधियों में आई तेजी ने किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए राहत की उम्मीद जगाई है।
आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि जुलाई के दौरान मानसून की मौजूदा रफ़्तार बनी रहती है, तो खरीफ़ बुवाई में आई कमी धीरे-धीरे कम हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश का वितरण अभी भी पूरे देश में समान नहीं है, लेकिन पिछले कुछ सप्ताहों में मानसून की सक्रियता बढ़ी है। इसके साथ ही जलाशयों और नदी बेसिनों में पानी की उपलब्धता में भी सुधार हो रहा है, जिससे आगामी दिनों में खेती को सहारा मिलने की संभावना है।
देशभर में 20% कम बारिश, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में सबसे अधिक कमी
रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से 6 जुलाई 2026 के बीच देश में कुल 170.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो दीर्घकालिक औसत (एलपीए) से लगभग 20 प्रतिशत कम है। हालांकि हाल के सप्ताहों में मानसून सक्रिय हुआ है, लेकिन बारिश का वितरण अभी भी असमान बना हुआ है। सबसे अधिक वर्षा की कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दर्ज की गई है, जहाँ सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा 19 प्रतिशत कम रही, जबकि मध्य भारत में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत दक्षिण भारत में सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।
राज्यों की बात करें तो बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और कर्नाटक में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। तमिलनाडु में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। मौसम विज्ञान के 36 उप-विभागों में से 17 में वर्षा की कमी दर्ज की गई है, 16 उप-विभागों में सामान्य वर्षा हुई है, जबकि 3 उप-विभागों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
खरीफ़ बुवाई अभी भी पिछड़ी, धान, दलहन और मोटे अनाज का रकबा सबसे अधिक घटा
मानसून की कमजोर शुरुआत का असर खरीफ़ फसलों की बुवाई पर साफ़ दिखाई दे रहा है। 5 जुलाई 2026 तक खरीफ़ फसलों की कुल बुवाई 3.51 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4.43 करोड़ हेक्टेयर थी। यानी इस बार बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में 20.8 प्रतिशत कम है।
सबसे अधिक गिरावट धान, दलहन और मोटे अनाज की बुवाई में दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश में देरी के कारण इन फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। इसके विपरीत गन्ना, जूट और मेस्ता की बुवाई अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है और इन फसलों पर मानसून की देरी का असर कम देखा गया है।
जलाशयों में बढ़ रहा पानी, अल नीनो के बावजूद मानसून में सुधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून की देर से शुरुआत के कारण जलाशयों में पानी का स्तर उम्मीद से कम था, लेकिन अब नदी बेसिनों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने लगी है। इससे सामान्य से कम वर्षा के प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अल नीनो की स्थिति मज़बूत होने के बावजूद हाल के दिनों में वर्षा गतिविधियों में सुधार देखने को मिला है। इसके पीछे एक कारण हिंद महासागर द्विध्रुव (इंडियन ओशन डाइपोल) का तटस्थ स्थिति में बने रहना भी माना गया है।
आईसीआईसीआई बैंक का कहना है कि यदि जुलाई के दौरान मानसून इसी तरह सक्रिय बना रहता है, तो खरीफ़ बुवाई को गति मिलेगी और मौसमी वर्षा की कमी धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। वर्तमान बारिश की गतिविधियाँ खेती और खरीफ़ बुवाई के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही हैं।