Khet Bachao Abhiyan: इनपुट डीलरों को दी गई बड़ी जिम्मेदारी, किसानों तक पहुँचेगी सही खेती की सलाह

Preeti Nahar | Jun 01, 2026, 18:40 IST
Image credit : Gaon Connection Network
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले सीतापुर में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने इनपुट डीलरों को खेती से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी देकर किसानों तक सही समय पर सही सलाह पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी। अभियान का फोकस संतुलित उर्वरक उपयोग, जैव उर्वरकों को बढ़ावा, मृदा स्वास्थ्य और उन्नत खेती पद्धतियों पर रहेगा। जानिए इस अभियान के पहले दिन क्या कुछ खास रहा।
सीतापुर में खेत बचाओ अभियान की शुरुआत

खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच सीतापुर में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाने के लिए इनपुट डीलरों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव और उप कृषि निदेशक के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस जिला स्तरीय कार्यक्रम में कृषि विभाग, विभिन्न लाइन विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में कृषि इनपुट विक्रेता शामिल हुए।



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बैठक में डॉ. दया ने कहा कि किसान अक्सर बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि आदानों की जानकारी के लिए सबसे पहले अपने क्षेत्र के इनपुट डीलरों से संपर्क करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि डीलरों के पास वैज्ञानिक और सही जानकारी हो, ताकि वे किसानों को उचित सलाह दे सकें। उन्होंने कहा कि खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य केवल किसानों को जागरूक करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें सही जानकारी गाँव-गाँव तक पहुंचे।



इनपुट डीलर बनेंगे अभियान की कड़ी

डॉ. दया ने बताया कि जिले में लगभग 2300 इनपुट डीलर कार्यरत हैं। अभियान के तहत इन्हें किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने का माध्यम बनाया जाएगा। योजना के अनुसार एक इनपुट डीलर करीब 20 न्याय पंचायतों तक जागरूकता गतिविधियों में सहयोग करेगा। वहीं वैज्ञानिकों की टीमें भी पंचायत स्तर पर किसानों से संवाद करेंगी।



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उन्होंने कहा कि किसानों को सही किस्म (Variety), सही कृषि सिद्धांत (Principles) और सही खेती पद्धतियों (Practices) की जानकारी समय पर मिलना बेहद जरूरी है। खरीफ सीजन में थोड़ी सी गलती भी उत्पादन और आय दोनों को प्रभावित कर सकती है।



जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने पर जोर

बैठक में जैव उर्वरकों और जैविक कृषि उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने डीलरों से कहा कि वे केवल उत्पाद बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों को इनके लाभ भी समझाएं। किसानों के बीच जागरूकता बढ़ेगी तो जैव उर्वरकों की मांग भी बढ़ेगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। डॉ. दया ने बताया कि संतुलित पोषण और जैव उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ-साथ खेती की लागत कम करने में भी मददगार हो सकता है।



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किसानों को दी जाएगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी

कार्यक्रम में भूमि समतलीकरण, चौड़ी मेड़बंदी, मृदा परीक्षण, हरी खाद और देशी खादों का उपयोग, जैव उर्वरक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग, मृदा आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग, बीज एवं भूमि उपचार, लाइन बुवाई तथा एकीकृत नाशीजीव एवं खरपतवार प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही इनपुट डीलरों को प्रेरित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों के साथ संगोष्ठियां आयोजित करें और वैज्ञानिक खेती के संदेश को गाँव स्तर तक पहुंचाएं।



सही समय पर सही सलाह का लक्ष्य

खेत बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम, मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार सही समय पर सही सलाह उपलब्ध कराना है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि किसान बुवाई से पहले वैज्ञानिक सलाह अपनाते हैं, तो उनकी लागत कम हो सकती है और उत्पादन में सुधार आ सकता है।



सीतापुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहाँ किसानों तक जानकारी पहुँचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और इनपुट डीलरों के बीच समन्वय को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

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