रायसेन से शुरू हुआ ‘खेत बचाओ अभियान’, अब गाँव-गाँव पहुंचकर किसानों को बताएंगे वैज्ञानिक कैसे बचाएं मिट्टी और घटाएं खेती की लागत
देशभर में 1 जून से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत हो गई है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान के तहत वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और कृषि अधिकारी गाँव-गाँव पहुंचकर किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, संतुलित खाद उपयोग, मौसम के अनुसार खेती और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की जानकारी देंगे। सरकार का दावा है कि इससे खेती की लागत घटेगी और खेतों की उत्पादकता बढ़ेगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने और खेती के भविष्य को सुरक्षित करने का राष्ट्रीय संकल्प है। उनका कहना है कि यदि मिट्टी की सेहत बिगड़ती रही तो आने वाले वर्षों में खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। इसलिए खेत बचाने का मतलब केवल जमीन बचाना नहीं, बल्कि किसान की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना भी है।
किसानों को मिलेगी खेत पर ही वैज्ञानिक सलाह
अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सीधे गाँवों में पहुंचेंगे। किसान अपनी फसल, मिट्टी और मौसम से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से बातचीत कर सकेंगे। उन्हें बताया जाएगा कि कौन-सी फसल उनके क्षेत्र के लिए बेहतर है, कम बारिश की स्थिति में क्या विकल्प अपनाए जा सकते हैं और बदलते मौसम के बीच नुकसान को कैसे कम किया जा सकता है।
सरकार चाहती है कि किसान केवल पारंपरिक अनुभव पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सलाह के आधार पर खेती के फैसले लें। इससे उत्पादन बढ़ाने और जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
‘कम खाद, सही खाद’ पर रहेगा पूरा फोकस
अभियान का एक बड़ा उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना है। कई राज्यों में जरूरत से ज्यादा यूरिया और अन्य रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। अभियान के दौरान किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर खाद डालने, जैविक विकल्प अपनाने, हरी खाद के उपयोग और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के बारे में जानकारी दी जाएगी।
योजनाओं का लाभ भी पहुंचेगा खेत तक
अभियान को केवल जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके साथ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं की जानकारी और लाभ भी किसानों तक पहुंचाने की योजना है। कई ऐसे किसान जो अब तक किसी सरकारी योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी अभियान के दौरान चिन्हित कर लाभ दिलाने की कोशिश की जाएगी।
1600 से अधिक टीमें मैदान में
देशभर में अभियान को सफल बनाने के लिए 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। इनमें कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), आईसीएआर संस्थान, कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो किसानों को संतुलित खाद उपयोग और मिट्टी संरक्षण के बारे में जागरूक करेंगी।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस अभियान से किसानों को सबसे बड़ा लाभ सही समय पर सही सलाह के रूप में मिल सकता है। यदि किसान मौसम, मिट्टी और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करेंगे तो उत्पादन लागत कम हो सकती है। संतुलित खाद उपयोग से उर्वरकों पर खर्च घटेगा और मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी। साथ ही सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलने से आर्थिक और तकनीकी सहायता तक पहुंच भी आसान होगी।
खेती बचेगी तो भविष्य सुरक्षित रहेगा
आने वाले वर्षों में खेती की सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगी। ऐसे में ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है। यदि यह अभियान गाँव स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है, तो इससे न केवल खेतों की सेहत सुधरेगी बल्कि किसानों की आय और खेती की स्थिरता भी मजबूत हो सकती है।