AGRO-TOURISM: समंदर किनारे चूल्हे का खाना, मेहमाननवाज़ी के साथ कमाई भी ज़्यादा
भारत के गाँवों के बारे में एक बात मशहूर है— गाँव में कोई अजनबी नहीं समझता खुद को। अगर आप अनजान बनकर भी किसी दहलीज पर खड़े हो जाएँगे, तो बिना आपको जाने ही लोग आपकी खातिरदारी में जुट जाएँगे। 'अतिथि देवो भव' की यह परंपरा हमारे डीएनए में है। क्या आपने कभी सोचा है कि यही मेहमाननवाज़ी किसी गाँव की तक़दीर बदल सकती है?
महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के एक खूबसूरत गाँव कर्दे ने इसे सच कर दिखाया है। इस गाँव ने अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ग्रामीण जीवनशैली को ही अपनी जीविका का ज़रिया बना लिया है। पहले गाँव के युवा काम की तलाश में शहरों की भीड़ का हिस्सा बन रहे थे। लेकिन जब से कर्दे ने एग्रो-टूरिज्म की राह पकड़ी है, तस्वीर बदल गई है।
अब युवाओं को नौकरी के लिए शहर जाने की मजबूरी नहीं है। किसी ने खुद का उद्यम शुरू किया है, तो कोई पर्यटन क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा है। जब गाँव में पर्यटकों की संख्या बढ़ी, तो खेती और दूध के व्यवसाय में फिर से जान आ गई। युवाओं में यह आत्मविश्वास जगा कि अपने गाँव की मिट्टी में रहकर भी भविष्य सँवारा जा सकता है।
आख़िर क्यों ख़ास हैं यहाँ के होमस्टे?
कर्दे की सबसे बड़ी ख़ासियत है यहां के होमस्टे। यहां कंक्रीट के होटलों वाला ठंडापन नहीं, बल्कि घर वाली गर्माहट मिलती है।गाँव की ही एक महिला शारदा बताती हैं, "शादी के बाद मैं घर की चारदीवारी तक सीमित थी। लेकिन जब होमस्टे शुरू हुए, तो मुझे काम मिला। अब मेरे हाथ खुद का पैसा आता है।"
इन होमस्टे में पर्यटकों को न सिर्फ़ रहने की जगह मिलती है, बल्कि चूल्हे पर बना पारंपरिक कोंकणी भोजन भी परोसा जाता है। यही स्वाद सैलानियों को बार-बार यहां खींच लाता है।
देश के नक़्शे पर चमका कर्दे
आज कर्दे गाँव भारत के नक़्शे पर 'बेस्ट एग्रो टूरिज्म' डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना चुका है। गाँववालों के लिए यह सिर्फ़ गर्व की बात नहीं, बल्कि मार्केटिंग का एक जरिया है, जिससे देशभर के पर्यटकों की यहां लाइन लगी रहती है।
अगली बार जब आप छुट्टियों का प्लान बनाएँ, तो किसी महंगे रिज़ॉर्ट के बजाय किसी ग्रामीण होमस्टे को चुनें। वहाँ आपको सोशल मीडिया के लिए शानदार तस्वीरें तो मिलेंगी ही, साथ ही आप अपनी जड़ों से जुड़ने का वह सुकून भी महसूस कर पाएंगे जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो गया है।