Lucknow Agriculture Conference: सीएम बोले- यूपी में “लैब टू लैंड” मॉडल सफल, यूपी के जिलों में लगेंगी आलू आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, बेहतर सरकारी योजनाओं, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति और केंद्र-राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यूपी में “लैब टू लैंड” की अवधारणा जमीन पर दिखाई दे रही है, जहां कृषि वैज्ञानिकों की रिसर्च सीधे खेतों तक पहुंच रही है और किसान उसका लाभ उठा रहे हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से बनें कृषि नीतियाँ
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, पानी की उपलब्धता और फसल पैटर्न अलग होता है। ऐसे में एक जैसी नीति हर जगह सफल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन इसी सोच का हिस्सा हैं, जहां स्थानीय समस्याओं और जरूरतों के अनुसार समाधान तैयार किए जा रहे हैं। इससे किसानों को उनकी जमीन और मौसम के अनुसार सही सलाह मिल सकेगी।
कृषि विज्ञान केंद्रों से किसानों तक पहुंच रही तकनीक
सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश के कई कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सक्रिय रूप से काम नहीं कर रहे थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज सभी केंद्र किसानों को नई तकनीक, आधुनिक खेती के तरीके, उन्नत बीज और प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रदेश के 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए गए हैं, जो कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं।
कृषि विकास दर में बड़ा सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार प्रयासों और तकनीकी बदलावों का असर उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह वृद्धि बहुफसली खेती, सिंचाई सुविधा, वैज्ञानिक खेती और किसानों की बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।
अब खेती को वैल्यू एडिशन से जोड़ने की जरूरत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसलों को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ना जरूरी है। यदि किसान केवल उपज बेचने के बजाय प्रोसेस्ड उत्पाद बेचेंगे, तो उन्हें अधिक लाभ मिलेगा। यही कृषि विकास का अगला चरण है।
तकनीक से बढ़ा धान उत्पादन
मुख्यमंत्री ने बताया कि वाराणसी में स्थापित इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट से नई धान किस्में विकसित हुई हैं। इन किस्मों और आधुनिक तकनीकों के कारण कई क्षेत्रों में धान का उत्पादन 50-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 100 क्विंटल तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सही बीज, वैज्ञानिक सलाह और बेहतर प्रबंधन से उत्पादन में बड़ा बदलाव संभव है।
खेती के लिए यूपी में बेहतर माहौल
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। प्रदेश की 85 प्रतिशत से अधिक भूमि सिंचित है, किसानों को 10-12 घंटे बिजली मिल रही है और गांवों तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी पहुंची है। इन सुविधाओं से खेती आसान हुई है और किसान अब नई फसलें अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
एक फसल से तीन फसल तक पहुंचे किसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई जिलों में जहां पहले किसान साल में केवल एक फसल लेते थे, अब वहां तीन-तीन फसलें ली जा रही हैं। कानपुर देहात, औरैया, इटावा, मैनपुरी, हरदोई और एटा जैसे जिलों में किसानों ने फसल चक्र बदलकर अधिक लाभ कमाना शुरू किया है। कुछ क्षेत्रों में मक्का जैसी फसल से किसान प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक का लाभ कमा रहे हैं।
किसानों को मिल रहा उपज का उचित मूल्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार द्वारा समय पर बीज उपलब्ध कराना, किसानों को जानकारी देना और खरीद केंद्र खोलना जैसे कदमों का सकारात्मक असर दिख रहा है। किसानों को अब अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
उत्पादन में यूपी की मजबूत स्थिति
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश के बड़े कृषि राज्यों में शामिल है। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल, 245 लाख मीट्रिक टन आलू और करीब 48 लाख मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा सब्जियों और अन्य फसलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
आलू किसानों के लिए भी बड़ा कदम
उन्होंने कहा कि आगरा में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर को स्वीकृति मिल चुकी है। इससे मध्य यूपी के जिलों में आलू आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगेंगी। इससे किसानों को बेहतर बाजार, अच्छी कीमत और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही आलू उत्पादन को वैल्यू एडिशन से जोड़ने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में कई बड़े नेता और अधिकारी रहे मौजूद
इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, यूपी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही समेत कई राज्यों के मंत्री, अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे। सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने, टिकाऊ खेती और नई तकनीकों पर चर्चा की गई।