Tea Tasting Course: क्या आप पहचान सकते हैं अच्छी चाय? Tea Board लेकर आया नया कोर्स, जानिए कैसे करें आवेदन
भारत में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहाँ दिन की शुरुआत या शाम की बातचीत चाय के बिना पूरी होती हो। किसी के लिए यह ताज़गी का ज़रिया है, तो किसी के लिए मेहमाननवाज़ी का हिस्सा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चाय का स्वाद परखना भी एक पेशा हो सकता है? अब चाय पसंद करने वाले युवाओं के लिए इसी क्षेत्र में करियर बनाने का नया मौका आया है।
टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल के कर्सियांग स्थित अपने दार्जिलिंग टी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (DTRDC) में टी टेस्टिंग (Tea Tasting) से जुड़े प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। बोर्ड का कहना है कि इन कोर्सों का उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जो चाय की गुणवत्ता पहचान सकें, उसका पेशेवर तरीके से स्वाद परख सकें और चाय उद्योग की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा कर सकें। इससे भारतीय चाय की गुणवत्ता बेहतर बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी खुलेंगे।
क्या है Tea Tasting Course?
यह एक कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें प्रतिभागियों को चाय की अलग-अलग किस्मों की पहचान करना, स्वाद और खुशबू का आकलन करना, चाय की गुणवत्ता समझना और पेशेवर तरीके से उसका परीक्षण करना सिखाया जाएगा। इसके अलावा टी ब्लेंडिंग (Tea Blending) यानी अलग-अलग चाय को मिलाकर नया स्वाद तैयार करने की जानकारी भी दी जाएगी। इन कोर्सों को राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) की मंज़ूरी मिली है। इन्हें एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) के सहयोग से तैयार किया गया है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) के अनुरूप विकसित किया गया है।
किसने तैयार किया पाठ्यक्रम?
टी बोर्ड के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों को तैयार करने में वाणिज्य विभाग, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, चाय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और अन्य पेशेवरों की एक समिति ने मिलकर काम किया है। कोशिश यह रही है कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिससे युवाओं को सीधे उद्योग में काम करने लायक कौशल मिल सके।
इस पहल के तहत युवाओं को टी टेस्टर (Tea Taster) और टी सोमेलियर (Tea Sommelier) के रूप में तैयार किया जाएगा। ऐसे लोग चाय की गुणवत्ता जाँचने, अलग-अलग किस्मों की पहचान करने, चाय के स्वाद का मूल्यांकन करने और ग्राहकों को सही चाय चुनने में मदद कर सकते हैं। टी बोर्ड का मानना है कि इससे भारतीय चाय की गुणवत्ता और बाज़ार में उसकी पहचान मज़बूत होगी। साथ ही चाय के बारे में लोगों की समझ भी बढ़ेगी और इस क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
60 घंटे और 210 घंटे के होंगे कोर्स
इस कार्यक्रम के तहत 60 घंटे और 210 घंटे के दो अलग-अलग प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। पहले बैच की शुरुआत दार्जिलिंग टी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में 60 घंटे के सर्टिफिकेट कोर्स से की गई है। इस कोर्स में चाय की पहचान, पेशेवर तरीके से स्वाद परखने की तकनीक, टी ब्लेंडिंग और चाय उद्योग में अपनाई जा रही नई कार्यप्रणालियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
किसे मिलेगा सबसे ज़्यादा फायदा?
यह पहल उन युवाओं के लिए फायदेमंद हो सकती है, जो चाय उद्योग में करियर बनाना चाहते हैं। इसके अलावा चाय बागानों, चाय कंपनियों, गुणवत्ता जाँच प्रयोगशालाओं, होटल और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह प्रशिक्षण उपयोगी हो सकता है। टी बोर्ड का मानना है कि प्रशिक्षित लोगों की संख्या बढ़ने से भारतीय चाय की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकेगा। इससे देश और विदेश के बाज़ारों में भारतीय चाय की पहचान मज़बूत होगी और चाय उद्योग को भी लाभ मिलेगा।
रोज़गार के साथ चाय की बेहतर समझ भी
भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में चाय की गुणवत्ता बनाए रखना और उसके बारे में लोगों की जानकारी बढ़ाना समय की ज़रूरत है। टी बोर्ड की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को नए कौशल से जोड़ने और चाय उद्योग के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।