लोहड़ी : उम्मीद, अभार और नई शुरुआत का प्रतीक
Gaurav Rai | Jan 13, 2026, 19:59 IST
मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाने वाला लोहड़ी पर्व ठंडक की विदाई, बसंत के स्वागत और फसल समृद्धि का प्रतीक होता है।
लोहड़ी पर्व न सिर्फ़ मौसम के बदलाव का संकेत देता है, बल्कि किसान, प्रकृति और समाज के आपसी रिश्ते को भी मज़बूत करता है।जब खेतों में गेहूं और सरसों की फ़सलें लहलहाने लगती हैं, तो किसान भगवान और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। इसी भावना के साथ मनाया जाता है फ़सल कटाई उत्सव लोहड़ी। इस दिन लोग आपसी मतभेद भूलकर एक-दूसरे के साथ खुशियां बाँटते हैं।
लोहड़ी का ज़िक्र दुल्ला भट्टी के बिना अधूरा है। लोककथाओं के अनुसार, दुल्ला भट्टी मुग़लकाल में पंजाब के एक वीर और न्यायप्रिय नायक थे। कहा जाता है कि उन्होंने उन ग़रीब लड़कियों की रक्षा की, जिन्हें दुष्ट लोग बेचने की कोशिश कर रहे थे। दुल्ला भट्टी ने न सिर्फ़ उन्हें बचाया, बल्कि उनका कन्यादान कर पिता का फ़र्ज़ भी निभाया।
आज भी लोहड़ी के अवसर पर बच्चे और बड़े मिलकर पारंपरिक गीत “सुंदर मुंदरिये हो… गाते हैं। इन गीतों के ज़रिए दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है और उनके साहस व मानवीय मूल्यों को सम्मान दिया जाता है।
लोहड़ी की शाम खुले आँगन या मोहल्ले में अलाव (Bonfire) जलाकर लोग उसके चारों ओर इकट्ठा होकर नाचते-गाते हैं। आग में तिल, गुड़, रेवड़ियां डालते हैं। माना जाता है कि अग्नि देवता जीवन के सारे दु:ख दूर कर देते हैं।
लोहड़ी का त्योहार स्वाद और परंपरा का संगम है। इस दिन ख़ास तौर पर मक्के की रोटी और सरसों का साग बनाया जाता है। जो पंजाब की पहचान है। तिल के लड्डू, गुड़ की गजक, मूँगफली और पॉपकॉर्न भी चाव से खाए जाते हैं।
इस दिन गन्ने के रस की खीर बनाने की परंपरा भी है, जो मिठास और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। व्यंजनों में तिल और गुड़ का इस्तेमाल शरीर को ठंड से बचाने में भी सहायक माना जाता है।
लोहड़ी जड़ों से जोड़ने का त्योहार है। यह पर्व याद दिलाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन, मेहनत का सम्मान और आपसी भाईचारा ही सच्ची समृद्धि की नींव है। लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि उम्मीद, आभार और नई शुरुआत का प्रतीक है।
लोकनायक दुल्ला भट्टी की अमर कहानी
आज भी लोहड़ी के अवसर पर बच्चे और बड़े मिलकर पारंपरिक गीत “सुंदर मुंदरिये हो… गाते हैं। इन गीतों के ज़रिए दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है और उनके साहस व मानवीय मूल्यों को सम्मान दिया जाता है।
आग के चारों ओर आस्था और उल्लास
लोहड़ी के पारंपरिक पकवान
इस दिन गन्ने के रस की खीर बनाने की परंपरा भी है, जो मिठास और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। व्यंजनों में तिल और गुड़ का इस्तेमाल शरीर को ठंड से बचाने में भी सहायक माना जाता है।