कम बारिश की आशंका के बीच सरकार की सलाह, किसान कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ें, दलहन-तिलहन बढ़ाने की सलाह

Gaon Connection | Jun 24, 2026, 15:46 IST
कम बारिश और अल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह दी है। कृषि मंत्रालय ने 315 संवेदनशील ज़िलों की पहचान की है, जिनमें 111 ज़िले उच्च प्राथमिकता वाले हैं। सरकार जल संरक्षण, फसल बीमा, कृषि ऋण और आकस्मिक योजनाओं पर काम कर रही है। मंत्रालय का कहना है कि खाद्यान्न भंडार पर्याप्त है और फ़िलहाल खाद्य सुरक्षा पर तत्काल कोई खतरा नहीं है।

देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने और अल नीनो के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी है। कृषि मंत्रालय ने किसानों से दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलों की ओर रुख़ करने को कहा है, ताकि संभावित कमज़ोर मानसून की स्थिति में उत्पादन और आय पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।



1 जून से अब तक देश में वर्षा सामान्य से 42 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाते हुए खरीफ़ सीज़न की तैयारियों की समीक्षा तेज़ कर दी है। सरकार का उद्देश्य कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखना और ग्रामीण आय पर संभावित दबाव को कम करना है।



315 ज़िलों को माना गया संवेदनशील

कृषि मंत्रालय ने 315 ऐसे ज़िलों की पहचान की है जहाँ सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। इनमें से 111 ज़िलों को उच्च प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा गया है, जहाँ सिंचाई सुविधाएँ सीमित हैं और खेती काफ़ी हद तक बारिश पर निर्भर है। मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद मंत्रालय ने बताया कि यदि वर्षा में कमी बनी रहती है तो ज़िला स्तर पर तैयार आकस्मिक योजनाओं के आधार पर फसल चयन, जल प्रबंधन और आपातकालीन उपायों को लागू किया जाएगा।



12 राज्यों के कई ज़िले प्रभावित होने की आशंका

मंत्रालय के अनुसार कम वर्षा की आशंका वाले अधिकांश ज़िले 12 राज्यों में स्थित हैं। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं। ये राज्य सोयाबीन, गन्ना, कपास, मूंगफली, मक्का और धान जैसी प्रमुख फसलों के बड़े उत्पादक माने जाते हैं।



जल संरक्षण पर बढ़ा ज़ोर

कृषि मंत्रालय ने कहा है कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को तेज़ किया जा रहा है। इसके तहत तालाबों, जलाशयों, चेक डैम और खेतों में जल भंडारण संरचनाओं की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण पर काम किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न नदी घाटियों में जलाशयों के जलस्तर की निगरानी भी की जा रही है। राज्यों को पेयजल और सिंचाई जल उपलब्धता को लेकर वैकल्पिक योजनाएँ तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि कम बारिश की स्थिति में किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।



शुरुआती फसलों पर बढ़ा दबाव

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के साप्ताहिक मौसम और फसल बुलेटिन के हवाले से बताया है कि दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में लगातार बनी गर्मी और कम बारिश के कारण मिट्टी की नमी में कमी आई है। 20 जून तक के सात दिनों में जिन इलाकों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, वहाँ शुरुआती चरण में बोई गई फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।



बीमा और ऋण सुविधाओं का दायरा बढ़ाएगी सरकार

कृषि मंत्रालय ने कहा है कि किसानों को राहत देने के लिए फसल बीमा, कृषि ऋण और आय सहायता योजनाओं तक पहुँच का विस्तार किया जा रहा है। मंत्रालय का कहना है कि देश में चावल और गेहूँ का भंडार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए कमज़ोर मानसून की आशंकाओं के बावजूद फ़िलहाल खाद्य सुरक्षा को लेकर कोई तात्कालिक जोखिम नहीं है।

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