मूँग खरीद पर सरकार के इस ऐलान के बाद भोपाल में खत्म हुआ किसानों को आंदोलन, जानें कैसे निकला समाधान
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पूरी मूँग खरीद की माँग को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन बुधवार को सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद समाप्त हो गया। राज्य सरकार ने पात्र किसानों से मूँग की खरीद की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने, खरीद की अंतिम तारीख बढ़ाने और उर्वरक वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को समीक्षा तक स्थगित करने का फ़ैसला किया। इसके बाद किसान संगठनों ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की।
सरकार और किसान नेताओं के बीच राज्य सचिवालय में हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा और 18 अन्य संगठनों के बैनर तले हज़ारों किसान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास से लगभग एक किलोमीटर पहले तक पहुँच गए थे। मंगलवार रात से जारी आंदोलन के कारण नर्मदापुरम रोड पर यातायात भी प्रभावित रहा था।
सरकार ने किसानों की कौन-कौन सी माँगें मानी?
राज्य सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा कि किसानों के व्यापक हित को देखते हुए प्रत्येक पात्र किसान से मूँग खरीद की सीमा मौजूदा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। यह फ़ैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था विशेष रूप से नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में प्रति एकड़ लगभग तीन क्विंटल मूँग उत्पादन करने वाले किसानों पर लागू होगी। साथ ही अधिकतम किसानों को इसका लाभ देने का प्रयास किया जाएगा। सरकार ने मूँग खरीद की अंतिम तारीख 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी है। वहीं स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है।
ई-टोकन व्यवस्था पर सरकार ने क्या फ़ैसला लिया?
राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने बताया कि उर्वरक वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों और व्यावहारिक दिक्कतों की जाँच के लिए एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार के लिए अपनी सिफ़ारिशें देगी। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने और आवश्यक बदलाव लागू होने तक ई-टोकन आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाएगा।
किसानों ने आंदोलन क्यों वापस लिया और केंद्र ने क्या कहा?
शुरुआत में कुछ किसान नेता एमएसपी पर मूँग की 100 प्रतिशत खरीद की माँग पर अड़े रहे और कहा कि सभी पक्षों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि कुछ ही देर बाद राष्ट्रवादी किसान आर्मी के प्रदेश संयोजक प्रतीक शर्मा ने बताया कि सरकार के फ़ैसलों से किसान संतुष्ट हैं और आंदोलन में शामिल सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसानों ने सरकार की घोषणाएँ स्वीकार कर ली हैं और वे अपने घर लौट रहे हैं। रोशनपुरा चौराहे से किसानों की सुरक्षित वापसी के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई। इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा और 18 अन्य संगठनों के बैनर तले हज़ारों किसानों ने कई बैरिकेड तोड़ दिए थे, शिवराज सिंह चौहान के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था और रोशनपुरा चौराहे पर डेरा डाल दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने बातचीत शुरू की थी। किसानों की प्रमुख माँगें ग्रीष्मकालीन मूँग की पूरी फसल की एमएसपी पर खरीद, उर्वरक वितरण में ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करना और अगली बुआई के लिए समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराना थीं।
इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए पीएम-आशा योजना के तहत मध्य प्रदेश में 4,54,580 मीट्रिक टन ग्रीष्मकालीन मूँग की खरीद को मंज़ूरी दी है। यह देशभर में इस योजना के तहत स्वीकृत कुल मात्रा का 87 प्रतिशत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र राज्यों के लिए खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं करता और योजना की निर्धारित सीमा से अधिक खरीद राज्य सरकार को अपने स्तर पर करनी होती है।