'बंदर पकड़ो और 600 रुपये पाओ', बंदरों के बढ़ते आतंक के बीच महाराष्ट्र सरकार का नया दांव, जानें पूरी खबर

Gaon Connection | Apr 27, 2026, 17:38 IST
महाराष्ट्र में बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। सरकार ने बंदर पकड़ने पर मिलने वाला मुआवजा 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया है। यह फैसला तुरंत लागू हो गया है। इसका उद्देश्य रेस्क्यू टीमों को सक्रिय करना है। कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र में किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।

महाराष्ट्र में इंसानों और बंदरों के बीच बढ़ता टकराव अब एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। शहरों की सड़कों से लेकर गांवों के खेतों तक, बंदरों का बढ़ता दखल लोगों की दिनचर्या और किसानों की मेहनत दोनों पर भारी पड़ रहा है। इसी लगातार बढ़ती परेशानी के बीच सरकार ने एक बड़ा और ध्यान खींचने वाला कदम उठाते हुए बंदरों को पकड़ने पर मिलने वाले मुआवजे को दोगुना करने का फैसला किया है। प्रशासन इसे समस्या के समाधान की दिशा में अहम पहल मान रहा है, लेकिन जमीन पर रहने वाले लोगों के मन में कई सवाल भी उठ रहे हैं—क्या यह कदम वाकई राहत देगा या फिर संघर्ष की तस्वीर और जटिल हो जाएगी?



मुआवजा बढ़ाकर 600 रुपये, तुरंत लागू आदेश

महाराष्ट्र सरकार ने बंदरों को पकड़ने पर मिलने वाला मुआवजा 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति बंदर कर दिया है। यह फैसला सोमवार को लिया गया और तुरंत प्रभाव से लागू भी कर दिया गया। दरअसल, हाल के दिनों में बंदरों के रिहायशी इलाकों और खेतों में घुसकर नुकसान पहुंचाने की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों और किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।



रेस्क्यू ऑपरेशन को मिलेगा बढ़ावा, तय SOP के तहत कार्रवाई

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मुआवजा बढ़ाने का उद्देश्य प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों और एजेंसियों को अधिक सक्रिय बनाना है, ताकि ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई हो सके। पकड़े गए बंदरों को मानव बस्तियों से दूर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाता है, जिससे बार-बार होने वाली घटनाओं को रोका जा सके। यह निर्णय 22 अप्रैल को जारी सरकारी प्रस्ताव (GR) के तहत लिया गया है, जो पिछले साल लागू किए गए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर आधारित है।



कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र में बढ़ा संकट, कई जिलों में परेशानी

राज्य के कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र के कई जिलों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। रत्नागिरी, रायगढ़ और सिंधुदुर्ग जैसे जिलों में फसल नुकसान की घटनाएं आम हो गई हैं। अकेले रत्नागिरी में 2024 से 2026 के बीच 5600 से ज्यादा बंदरों के कारण संघर्ष के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मुंबई के बोरीवली, आरे कॉलोनी, ठाणे और मुलुंड जैसे इलाकों में भी बंदरों के हमलों और उपद्रव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।

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