महाराष्ट्र के इस मॉडल से यूपी में बढ़ सकती है किसानों की कमाई, ट्रेनिंग से खेती को कारोबार बनाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे कारोबार से जोड़ने की दिशा में एक नए मॉडल पर विचार हो रहा है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सचिव डॉ. हीरा लाल ने अपर प्रमुख सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन श्री वी.एल. मीणा को भेजे पत्र में महाराष्ट्र के वर्धा जिले में ग्लोबल विकास ट्रस्ट (GVT) द्वारा चलाए जा रहे कृषि प्रशिक्षण मॉडल के बारे में जानकारी दी है। विभाग की छह सदस्यीय टीम ने 10 अगस्त 2026 को वर्धा पहुंचकर वहां की व्यवस्था और किसानों के लिए चलाए जा रहे प्रशिक्षण को देखा। इस मॉडल में किसानों को खेती के साथ कृषि-व्यवसाय की बारीकियां सिखाई जाती हैं, ताकि वे अपनी उपज और संसाधनों से ज्यादा आमदनी का रास्ता बना सकें।
वर्धा में यह पहल ऐसे क्षेत्र में शुरू हुई, जहां पानी की कमी के कारण खेती लंबे समय से चुनौती बनी हुई थी। GVT ने वर्ष 2015 में जल संरक्षण से काम शुरू किया और बाद में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को व्यवसाय से जोड़ने पर फोकस किया। करीब 25 एकड़ में ‘कृषि कुल’ नाम से प्रशिक्षण संस्थान तैयार किया गया है, जहां किसानों को दो दिन की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाती है। पत्र में दिए गए विवरण के मुताबिक, इस प्रशिक्षण के बाद कृषि-व्यवसाय अपनाने वाले किसानों की आय में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई। अब उत्तर प्रदेश में भी किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों को इस तरह की ट्रेनिंग दिलाने की संभावना पर फैसला लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
पानी की समस्या से निकला खेती को कारोबार बनाने का मॉडल
वर्धा में GVT ने सबसे पहले पानी की कमी की समस्या पर काम किया। इसके बाद किसानों को यह समझाने और सिखाने पर जोर दिया गया कि खेती को केवल फसल उगाने तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े दूसरे कारोबारी अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
इसी सोच के तहत करीब 25 एकड़ में ‘कृषि कुल’ प्रशिक्षण संस्थान बनाया गया। यहां किसानों को व्यावहारिक तरीके से कृषि-व्यवसाय से जुड़ी जानकारी दी जाती है। दो दिन की ट्रेनिंग के जरिए किसानों को अपनी खेती को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने और उससे अधिक आर्थिक लाभ हासिल करने की दिशा में तैयार किया जाता है।
किसानों की आय 2 से 3 गुना बढ़ने का दावा
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत किसानों की आय में हुआ बदलाव बताया गया है। पत्र में दी गई जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण लेने के बाद कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने वाले किसानों की आमदनी दो से तीन गुना तक बढ़ी। यानी किसान केवल फसल उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय कृषि से जुड़े व्यावसायिक अवसरों का इस्तेमाल कर अतिरिक्त कमाई की ओर बढ़े।
ऐसे मॉडल का फायदा यह हो सकता है कि किसान अपनी उपज का बेहतर इस्तेमाल कर सकें और खेती की पूरी प्रक्रिया को आय के अलग-अलग स्रोतों से जोड़ सकें। इससे कृषि को केवल पारंपरिक आजीविका के बजाय व्यवस्थित ग्रामीण कारोबार के रूप में विकसित करने की संभावना बढ़ती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में लागू होने पर इसके नतीजे स्थानीय परिस्थितियों, फसल पैटर्न और किसानों की भागीदारी पर निर्भर करेंगे।
यूपी में किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों को मिल सकती है ट्रेनिंग
वर्धा मॉडल का जायज़ा लेने के बाद उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की ट्रेनिंग की संभावना सामने आई है। विभागीय पत्र में अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों को GVT के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाने के लिए उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है। अगर यह मॉडल यूपी में अपनाया जाता है तो किसानों को खेती के साथ कृषि-व्यवसाय की समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार से बेहतर जुड़ाव जैसे अवसर तलाशने की गुंजाइश बनेगी। सबसे बड़ा संभावित फायदा किसानों की आय के स्रोत बढ़ाना और उन्हें सिर्फ कच्ची कृषि उपज बेचने पर निर्भरता से बाहर निकालना हो सकता है।
फिलहाल विभाग की ओर से वर्धा मॉडल को समझने और उसके आधार पर आगे की दिशा तय करने की प्रक्रिया चल रही है। महाराष्ट्र के अनुभव को उत्तर प्रदेश की कृषि परिस्थितियों के हिसाब से किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा, यह आगे होने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगा।