Kharif Season: मक्का उत्पादन पर मौसम की मार का खतरा, 50 लाख टन कम हो सकता है उत्पादन, USDA ने घटाया अनुमान
इस खरीफ सीज़न में मक्का किसानों की चिंता बढ़ सकती है। कमजोर मानसून और कई राज्यों में घटे बुवाई रकबे ने मक्के की फसल के उत्पादन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी कृषि विभाग यानी यूएसडीए (USDA) की 28 अगस्त 2026 की ‘India: Grain and Feed Update’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 2026-27 मक्का उत्पादन का अनुमान करीब 10% घटाकर 5 करोड़ टन किया गया है।
यह अनुमान ऐसे समय आया है जब खेतों में मक्के की फसल खड़ी है और बारिश की कमी का असर उसकी बढ़वार पर पड़ सकता है। 28 अगस्त तक देश में मक्के की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 4% कम रही है। अगर आने वाले समय में बारिश सामान्य नहीं रही, तो सिर्फ़ खरीफ ही नहीं बल्कि रबी और जायद सीज़न के मक्के पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
50 लाख टन कम हो सकता है मक्के का उत्पादन
यूएसडीए की इसी रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 में भारत का मक्का उत्पादन करीब 50 मिलियन टन यानी 5 करोड़ टन रह सकता है। इसके मुकाबले कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान में 2025-26 के दौरान देश में मक्के का उत्पादन करीब 5.5 करोड़ टन रहने की बात कही गई थी। इस तरह पिछले सीज़न के अनुमान की तुलना में इस बार उत्पादन में करीब 50 लाख टन की कमी का अनुमान है। गौर करने वाली बात यह भी है कि 2025-26 का उत्पादन 2024-25 के मुकाबले करीब 27% अधिक था।
28 अगस्त तक मक्के की बुवाई में कमी
मक्का उत्पादन को लेकर चिंता सिर्फ़ मौसम तक सीमित नहीं है। इस खरीफ सीज़न में मक्के का रकबा भी पिछले साल से कम रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त तक किसानों ने करीब 89.99 लाख हेक्टेयर में मक्का बोया था। पिछले साल इसी अवधि तक यह रकबा 93.87 लाख हेक्टेयर था। यानी एक साल में मक्के की बुवाई का क्षेत्र करीब 4% घटा है। रकबे में कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है, खासकर तब जब फसल को पर्याप्त बारिश और मिट्टी में नमी न मिले।
कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
मक्के के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता बारिश की कमी है। यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार जून में कमजोर मानसून की वजह से मक्के की बुवाई करीब दो हफ्ते तक पीछे चली गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी के कारण खेतों में खड़ी फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में बारिश में सुधार नहीं हुआ तो फसल की उपज प्रभावित हो सकती है। यूएसडीए के मुताबिक अगस्त और सितंबर में अगर बारिश कम रहती है, तो मिट्टी में नमी की कमी आगे चलकर रबी और जायद सीज़न के मक्के को भी प्रभावित कर सकती है। वहीं सितंबर में खरीफ मक्के की कटाई के दौरान भी मौसम अहम रहेगा। लंबे समय तक बारिश न होना फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दूसरी तरफ़ अचानक बहुत ज्यादा बारिश या बाढ़ आने पर भी तैयार फसल को नुकसान हो सकता है और उत्पादन का अनुमान और नीचे जा सकता है।
कर्नाटक में मक्के का रकबा 26% घटा
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के कई प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में इस बार बुवाई का क्षेत्र घटा है। कर्नाटक में खरीफ मक्के का रकबा करीब 26% घटकर 12.58 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले साल यह 17 लाख हेक्टेयर था। महाराष्ट्र में भी करीब 11% की कमी आई है और रकबा 12.9 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल यह 14.52 लाख हेक्टेयर था। मध्य प्रदेश में रकबा करीब 2.22 प्रतिशत घटकर 26.4 लाख हेक्टेयर और तेलंगाना में करीब 13% घटकर 2.3 लाख हेक्टेयर रह गया है।
कुछ राज्यों में बढ़ा मक्के का रकबा
हालाँकि सभी राज्यों में मक्के की बुवाई कम नहीं हुई है। राजस्थान में मक्के का रकबा करीब 9.85% बढ़कर 9.76 लाख हेक्टेयर हो गया है। गुजरात में यह करीब 3.59 % बढ़कर 2.71 लाख हेक्टेयर और हिमाचल प्रदेश में 3.67 % बढ़कर 2.54 लाख हेक्टेयर हो गया है। यानी कुछ राज्यों में किसानों ने मक्के का रकबा बढ़ाया है, लेकिन प्रमुख उत्पादक राज्यों में आई कमी का असर कुल उत्पादन पर पड़ सकता है।
यूएसडीए के स्थानीय कार्यालय के ताज़ा अनुमान के मुताबिक 2026-27 में भारत में मक्के की कुल खपत करीब 51 मिलियन टन रह सकती है। पिछले साल मक्के की खपत करीब 48 मिलियन टन रहने का अनुमान था। यानी उत्पादन घटने की आशंका के बीच मक्के की मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में अगर मौसम की वजह से फसल और उत्पादन प्रभावित होता है, तो आगे चलकर मक्के की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है।
आने वाले हफ्ते किसानों के लिए अहम
फिलहाल मक्का किसानों के लिए आने वाले हफ्ते बेहद अहम हैं। खेतों में खड़ी फसल को पर्याप्त नमी मिलना और कटाई के समय मौसम का साथ देना जरूरी होगा। बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही या कटाई के दौरान मौसम बिगड़ा, तो उत्पादन का मौजूदा अनुमान भी बदल सकता है। एक तरफ़ बुवाई का रकबा घटा है और यूएसडीए ने उत्पादन अनुमान में कटौती की है, वहीं दूसरी तरफ़ खपत बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में किसानों से लेकर मक्का कारोबार से जुड़े लोगों की निगाह अब मानसून के रुख और आने वाले उत्पादन आंकड़ों पर टिकी है।