मराठवाड़ा में गहराया जल संकट, 10 दिनों में 100 से ज्यादा गाँव टैंकरों पर हुए निर्भर, भीषण गर्मी के बीच बढ़ी पानी की किल्लत

Preeti Nahar | May 14, 2026, 18:57 IST
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में गर्मी से जल संकट बढ़ रहा है। 10 दिनों में टैंकरों पर निर्भर गाँवों की संख्या 100 पार कर गई है। प्रशासन 119 गाँवों और 55 बस्तियों में पानी पहुँचा रहा है। छत्रपति संभाजीनगर सबसे ज्यादा प्रभावित है। पिछले साल की तुलना में स्थिति थोड़ी बेहतर है। प्रशासन कुओं का अधिग्रहण कर रहा है।

Marathwada water crisis: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भीषण गर्मी के चलते जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले सिर्फ 10 दिनों में टैंकरों पर निर्भर गाँवों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है। प्रशासन को कई इलाकों में आपात व्यवस्था के तहत पानी पहुँचाना पड़ रहा है। संभागीय आयुक्त कार्यालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में 194 पानी के टैंकर मराठवाड़ा के छह जिलों में 119 गाँवों और 55 बस्तियों तक पानी पहुँचा रहे हैं। लगातार बढ़ते तापमान और घटते जल स्रोतों के कारण ग्रामीण इलाकों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।



छत्रपति संभाजीनगर सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा प्रभावित जिला छत्रपति संभाजीनगर है। यहां अकेले 128 टैंकरों के जरिए 86 गाँवों और 19 बस्तियों में पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके बाद जालना जिले में 49 टैंकर तैनात किए गए हैं। वहीं नांदेड में 8, परभणी में 5 और हिंगोली व लातूर में 2-2 टैंकरों के जरिए लोगों तक पानी पहुँचाया जा रहा है। हालांकि बीड़ और धाराशिव जिलों में फिलहाल टैंकर नहीं भेजे गए हैं। यहाँ प्रशासन स्थानीय कुओं के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।



सिर्फ 10 दिनों में तेजी से बढ़ा संकट

अधिकारियों के अनुसार कुछ दिन पहले तक केवल 92 गाँव और 35 बस्तियां टैंकरों पर निर्भर थीं, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति तेजी से बदली है। अब यह संख्या बढ़कर 119 गाँव और 55 बस्तियों तक पहुँच गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार स्थिति थोड़ी बेहतर बताई जा रही है। 6 मई 2025 को मराठवाड़ा में 435 टैंकरों के जरिए 278 गाँवों और 99 बस्तियों में पानी पहुँचाया जा रहा था।



प्रशासन ने बढ़ाई कुओं की संख्या

जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन स्थानीय जल स्रोतों का भी इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 6 मई तक प्रशासन ने 268 कुओं का अधिग्रहण किया था, लेकिन 15 मई तक यह संख्या बढ़कर 461 हो गई। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराना और टैंकरों पर निर्भरता कम करना है।



सिंचाई परियोजनाओं में पिछले साल से बेहतर जल भंडारण

भीषण गर्मी के बावजूद इस साल सिंचाई परियोजनाओं में पानी का भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। मराठवाड़ा की 758 छोटी सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान जल भंडारण 26 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह केवल 16 प्रतिशत था। वहीं क्षेत्र की 11 बड़ी परियोजनाओं में इस समय 47.47 प्रतिशत जल भंडारण मौजूद है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 38 प्रतिशत था।



गर्मी बढ़ने के साथ चुनौती और बढ़ सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने पर पानी की मांग और ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में जल संरक्षण, सीमित उपयोग और बेहतर प्रबंधन बेहद जरूरी होगा। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टैंकरों तथा जल स्रोतों की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहा है।

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