विदेशी बाज़ारों तक पहुँचेगी मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, ₹175 करोड़ का मिशन गोल्डन स्पाइस लॉन्च; निर्यात पर रहेगा फ़ोकस
मेघालय की विश्वप्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त लाकाडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric) को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र और मेघालय सरकार ने 175.45 करोड़ रुपये की 'मिशन गोल्डन स्पाइस' पहल शुरू की है। इस मिशन के तहत लाकाडोंग हल्दी की खेती का विस्तार, आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाओं का विकास, निर्यात को बढ़ावा और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फ़ोकस रहेगा। इस परियोजना से पश्चिम और पूर्व जैंतिया हिल्स के 17,500 से अधिक किसान परिवारों को सीधा फ़ायदा मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली के संचार भवन में मंगलवार को केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मिशन का शुभारंभ किया। वर्ष 2026 से 2030 तक चलने वाली इस परियोजना को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और मेघालय सरकार के संयुक्त वित्तीय सहयोग से लागू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य लाकाडोंग हल्दी की पूरी वैल्यू चेन विकसित कर इसे वैश्विक बाज़ार में मज़बूत पहचान दिलाना है।
7 हज़ार हेक्टेयर तक बढ़ेगी खेती, किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि लाकाडोंग हल्दी दुनिया में प्राकृतिक रूप से सबसे अधिक करक्यूमिन वाली हल्दी में शामिल है और अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि मिशन गोल्डन स्पाइस के ज़रिए खेती का विस्तार किया जाएगा, किसानों को बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराया जाएगा और वर्ष 2030 तक उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में काम होगा।
परियोजना के तहत लाकाडोंग हल्दी की खेती में 7,000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र जोड़ा जाएगा। इससे वर्ष 2030 तक कुल खेती का रकबा बढ़कर 9,581 हेक्टेयर हो जाएगा। इसके साथ ही वार्षिक उत्पादन में लगभग 49,400 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कुल उत्पादन क़रीब 60,000 मीट्रिक टन तक पहुँच सकेगा। किसानों की आय प्रति 1,000 किलोग्राम उत्पादन पर लगभग 40 हज़ार रुपये से बढ़ाकर 83,700 रुपये तक ले जाने की योजना है।
प्रोसेसिंग प्लांट, एफपीओ और निर्यात पर रहेगा फ़ोकस
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि यह परियोजना मेघालय में कृषि आधारित वैल्यू चेन को मज़बूत बनाने की दिशा में बड़ा क़दम है। उन्होंने बताया कि सरकार किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से किसानों की बाज़ार और वित्तीय पहुँच मज़बूत कर रही है। राज्य में अनानास, अदरक, कटहल, शहद और मशरूम जैसी फ़सलों के लिए भी इसी तरह की वैल्यू चेन विकसित की जा रही है।
मिशन के तहत पश्चिम जैंतिया हिल्स में 41.69 करोड़ रुपये की लागत से एक एकीकृत जैविक हल्दी प्रोसेसिंग और करक्यूमिन निष्कर्षण (Curcumin Extraction) संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसकी क्षमता हर वर्ष 7,000 मीट्रिक टन ताज़ी हल्दी की प्रोसेसिंग की होगी। इसके अलावा 28 एकीकृत एफपीओ पैकहाउस, 28 क्लस्टर गोदाम और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए 35 करोड़ रुपये की सहायता भी दी जाएगी।
3,000 नए रोज़गार सृजित होंगे, महिलाओं की होगी अहम भागीदारी
परियोजना की कुल लागत में से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 87.62 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय उत्पादन बढ़ाने और जैविक प्रमाणन के लिए 58.10 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा, जबकि मेघालय सरकार ब्रांडिंग, एफपीओ की कार्यशील पूँजी, जीआई संरक्षण और निर्यात से जुड़े ट्रेसबिलिटी सिस्टम पर 29.73 करोड़ रुपये ख़र्च करेगी।
मेघालय के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने कहा कि मिशन का उद्देश्य लाकाडोंग हल्दी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और निर्यात-उन्मुख उत्पाद बनाना है। इस परियोजना से 3,000 से अधिक नए रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है, जिनमें महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री सम्मानित लाकाडोंग हल्दी उत्पादक ट्रिनिटी सायू और किसान झानिका सियांगशाई ने भी अपने अनुभव साझा किए।