नेपाल में तबाही के बीच चमत्कार! 9 दिन बाद हाइड्रोपावर सुरंग से 2 लोग ज़िंदा निकले; 4798 लोग अब भी लापता
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब के नौ दिन बाद राहत और बचाव अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। त्रिशूली नदी से जुड़े एक हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग से शुक्रवार को दो लोगों को ज़िंदा बाहर निकाला गया। यह बचाव ऐसे समय हुआ है जब नेपाल में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,280 हो गई है, जबकि 4,798 लोग अब भी लापता हैं। बर्फ, चट्टान और कीचड़ के सैलाब ने त्रिशूली नदी की घाटी और चीन के तिब्बत से लगे इलाकों में भारी तबाही मचाई है।
अधिकारियों और बचावकर्मियों का अनुमान है कि 26 अगस्त को ऊपरी त्रिशूली नदी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने के बाद नदी किनारे स्थित छह हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में कम से कम 900 लोग फँस गए थे। शुक्रवार को बचाए गए दोनों कर्मचारी इन हाइड्रोपावर परियोजनाओं से ज़िंदा निकाले गए पहले लोगों में हैं। उन्हें काठमांडू के सेना अस्पताल ले जाया गया। इनमें से एक कर्मचारी ने बचावकर्मियों को बताया कि सुरंग में फँसे रहने के दौरान वह मंत्रों का जाप करता रहा। उसने यह भी कहा कि सुरंग के भीतर तीन-चार और लोग ज़िंदा हो सकते हैं और संभव है कि सुरंग के और अंदर भी लोग जीवित हों।
नौ दिन बाद सुरंग से दो कर्मचारी ज़िंदा निकले
ऊपरी त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग से शुक्रवार को मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइज़र कबीर महर्जन को ज़िंदा बाहर निकाला गया। नेपाल के ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ के कार्यालय ने दोनों कर्मचारियों के बचाए जाने की जानकारी दी। नेपाल के अधिकारियों की ओर से जारी तस्वीरों और वीडियो में देखा गया कि कबीर महर्जन को ज़मीन में बने एक छेद से बाहर निकाला गया। उन्हें बाहर निकालते ही वहां मौजूद लोगों ने खुशी जताई और इसके बाद स्ट्रेचर पर उन्हें ले जाया गया। संजय साह को एक अन्य कर्मचारी अपनी पीठ पर लेकर सुरंग से बाहर आया। उनका चेहरा कीचड़ से ढका हुआ था।
संजय ने बताया- सुरंग में मंत्रों का जाप करता रहा
सुरंग से बाहर आने के बाद सेना के डॉक्टरों ने संजय साह की शुरुआती जाँच की। बचाव शिविर में उनके महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की जाँच की गई और उन्हें ऑक्सीजन मास्क लगाया गया। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि संजय के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानक सामान्य दिखाई दे रहे थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। ‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, संजय साह ने बचावकर्मियों को बताया कि सुरंग में फँसे रहने के दौरान वह कुछ समय मंत्रों का जाप करते रहे। उन्होंने यह भी बताया कि सुरंग में तीन या चार अन्य लोग भी ज़िंदा हो सकते हैं। उनके मुताबिक, सुरंग के और भीतर इससे भी अधिक लोगों के जीवित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
छह हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फँसे थे लोग
अधिकारियों और बचावकर्मियों का मानना है कि 26 अगस्त को ऊपरी त्रिशूली नदी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से आई बाढ़ और मलबे ने नदी के किनारे स्थित छह हाइड्रोपावर परियोजनाओं को प्रभावित किया। अनुमान है कि इन परियोजनाओं की सुरंगों में कम से कम 900 लोग फँसे हो सकते हैं। इससे पहले एक दूसरी सुरंग से कुछ लोग आपदा के कुछ घंटे बाद बाहर निकलने में सफल हुए थे। शुक्रवार को बचाए गए संजय साह और कबीर महर्जन हाइड्रोपावर परियोजनाओं से इस आपदा के बाद ज़िंदा निकाले गए पहले दो कर्मचारियों में हैं।
नेपाल पुलिस की ताज़ा जानकारी के मुताबिक, देश में इस आपदा से अब तक 1,280 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,798 लोग लापता हैं। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और बचाव दल अभी भी प्रभावित इलाकों तथा हाइड्रोपावर सुरंगों में तलाश अभियान चला रहे हैं।