मानसून 2026: केरल में समय से पहले दस्तक के संकेत, लेकिन El Niño बढ़ा सकता है किसानों की चिंता, खरीफ़ की फसलों पर पड़ेगा असर

Preeti Nahar | May 03, 2026, 11:45 IST
Image credit : Gaon Connection Network
मानसून 2026 केरल में समय से पहले या तय समय पर पहुंच सकता है, जिससे शुरुआती राहत की उम्मीद है। हालांकि जुलाई से El Niño के असर के चलते बारिश का वितरण प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ सकती है।

IMD Monsoon Forecast: देशभर में गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसी बीच मानसून 2026 को लेकर राहत भरी और चिंता बढ़ाने वाली दोनों तरह की खबरें सामने आ रही हैं। भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल केरल में जून की शुरुआत में समय पर या थोड़ा पहले पहुंच सकता है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि जुलाई से El Niño की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसूनी बारिश की रफ्तार और वितरण प्रभावित हो सकता है।



कब पहुंचेगा मानसून?

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल तट पर दस्तक देता है। इस बार IMD का कहना है कि 14 से 20 मई के बीच अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मानसूनी गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, जो मानसून की प्रगति का पहला बड़ा संकेत माना जाता है। इसके बाद मानसून केरल पहुंचेगा और जुलाई तक देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर सकता है।



प्री-मानसून बारिश से राहत

मई महीने में देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। India Meteorological Department के अनुसार दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और कुछ मध्य भारतीय इलाकों में प्री-मानसून बारिश देखने को मिल सकती है। इससे फिलहाल गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन तेज आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा भी बना रहेगा।



इस साल कितनी बारिश होगी?

IMD ने अपने पहले दीर्घकालिक पूर्वानुमान में कहा है कि जून से सितंबर के बीच देशभर में कुल मानसूनी बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 92% रहने की संभावना है, जिसे 'below normal' श्रेणी में रखा गया है।



IMD के मुताबिक:



  1. 35% संभावना है कि बारिश ‘deficient’ रह सकती है
  2. 31% संभावना है कि बारिश ‘below normal’ हो सकती है
  3. सामान्य या उससे ज्यादा बारिश की संभावना अपेक्षाकृत कम है।

El Niño क्यों बढ़ा रहा है चिंता?

फिलहाल प्रशांत महासागर में ENSO-neutral स्थिति बनी हुई है, लेकिन IMD के अनुसार जुलाई से El Niño विकसित हो सकता है, जो जनवरी 2027 तक जारी रह सकता है।



El Niño बनने पर आमतौर पर भारत में:



  1. मानसून कमजोर पड़ सकता है
  2. कई राज्यों में बारिश की कमी हो सकती है
  3. धान, दाल और तिलहन जैसी खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है
  4. जलाशयों के स्तर और बिजली उत्पादन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

किसानों पर क्या होगा असर?

अगर मानसून समय पर आता है तो किसानों को धान, मक्का, सोयाबीन और कपास की बुवाई शुरू करने में आसानी होगी। लेकिन अगर जुलाई-अगस्त में बारिश कमजोर पड़ती है, तो खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखें और बुवाई की योजना उसी हिसाब से बनाएं।



India Meteorological Department मई के आखिरी सप्ताह में मानसून को लेकर अपना अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करेगा। तब यह साफ हो पाएगा कि इस साल बारिश सामान्य रहेगी या El Niño का असर ज्यादा देखने को मिलेगा। फिलहाल किसानों और आम लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हैं।

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