जून के पहले पखवाड़े में 32% कम बारिश, देश के 65% हिस्से में वर्षा की कमी, किसानों की निगाहें आसमान पर
दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत इस बार देश के अधिकांश हिस्सों में अपेक्षा से कमजोर रही है। खरीफ़ फसलों की बुआई के अहम दौर में बारिश की कमी ने किसानों और कृषि क्षेत्र की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार 1 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य 62.1 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 42.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 32 प्रतिशत कम है। स्थिति का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के लगभग 65 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत को छोड़कर बाकी तीनों प्रमुख मौसमीय क्षेत्रों में बारिश सामान्य से नीचे रही। सबसे अधिक कमी मध्य भारत में दर्ज की गई, जबकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में भी मानसून की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं, लेकिन फिलहाल बारिश की कमी ने खरीफ़ सीज़न की शुरुआत को प्रभावित किया है।
उत्तर-पश्चिम भारत को छोड़ बाकी क्षेत्रों में बारिश की कमी
IMD के आँकड़ों के अनुसार चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में से केवल उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक बारिश हुई। इस क्षेत्र में 25.4 मिमी के सामान्य स्तर के मुकाबले 27.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक है। वहीं मध्य भारत, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार वर्षा की सबसे अधिक कमी मध्य भारत में दर्ज की गई।
मध्य भारत में 57% कम बारिश
ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात को शामिल करने वाले मध्य भारत क्षेत्र में 53 मिमी के सामान्य स्तर के मुकाबले केवल 22.7 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य से 57 प्रतिशत कम है। वहीं पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों वाले क्षेत्र में 136 मिमी के सामान्य स्तर के मुकाबले 80.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत कम है।
दक्षिण भारत में भी सामान्य से कम वर्षा
केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी को शामिल करने वाले दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 15 जून तक 68.2 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि का दीर्घकालिक औसत (LPA) 75 मिमी है। यानी इस क्षेत्र में 9 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।
21 उपखंडों में सामान्य से कम बारिश
देश के 36 मौसम उपखंडों में से 6 उपखंडों में अत्यधिक कमी वाली वर्षा (60 से 99 प्रतिशत कम) दर्ज की गई। वहीं 15 उपखंडों में 20 से 59 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। केवल 8 उपखंडों में सामान्य वर्षा दर्ज की गई, जबकि 5 उपखंडों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई। पूर्वी राजस्थान और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह ऐसे दो क्षेत्र रहे, जहां सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई।
अगले 4-5 दिनों में मानसून के आगे बढ़ने के संकेत
मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 4 से 5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक के शेष हिस्सों, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। सोमवार को मानसून ने पूरे आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल को कवर कर लिया। इसके अलावा तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में भी मानसून आगे बढ़ा है।
कई राज्यों में बढ़ेगा तापमान, हीटवेव का अलर्ट
IMD के अनुसार 18 जून तक उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इसके बाद 21 जून तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने की संभावना है। मौसम विभाग ने तेलंगाना में 15-16 जून, विदर्भ में 15-17 जून के दौरान लू चलने की आशंका जताई है। वहीं कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और ओडिशा में गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी जारी की गई है।