मानसून की कमी के बीच जलाशयों में बढ़ा पानी, फिर भी पिछले साल से 18% कम भंडारण, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के बीच प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता का 64.16 प्रतिशत पानी मौजूद है। इन जलाशयों की कुल क्षमता 183.565 अरब घन मीटर (BCM) है, जिसमें से 117.773 BCM पानी का भंडारण दर्ज किया गया है। हालांकि, जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने के बावजूद तस्वीर पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है, क्योंकि करीब 35 प्रतिशत जलाशय अभी भी अपनी आधी से कम क्षमता के साथ भरे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, पांच प्रमुख जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि 20 जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है। इसके बावजूद इस साल जलाशयों में उपलब्ध पानी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 18 प्रतिशत कम है और सामान्य स्तर से भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय बने रहने से जलाशयों में पानी की आवक जारी है। 20 अगस्त तक देश में मानसून सामान्य से 13 प्रतिशत कम रहा है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी 26 प्रतिशत, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्से में 22 प्रतिशत है। इस बीच पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में बन रहा निम्न दबाव का क्षेत्र आने वाले दिनों में बारिश ला सकता है, जिससे जलाशयों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
166 प्रमुख जलाशयों में 117.773 BCM पानी
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 BCM है। इनमें इस सप्ताह 117.773 BCM पानी दर्ज किया गया। यह कुल क्षमता का 64.16 प्रतिशत है। जलाशयों में पानी का स्तर पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के कारण कई क्षेत्रों में हुई बारिश से जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है।
पांच जलाशय पूरी तरह भरे
देश के प्रमुख जलाशयों में से पांच इस समय 100 प्रतिशत तक भर चुके हैं। वहीं, 20 अन्य जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल भंडारण क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक है। इससे कुछ क्षेत्रों में जल उपलब्धता की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन सभी प्रमुख जलाशयों की स्थिति एक जैसी नहीं है।
35 प्रतिशत जलाशय आधे से कम भरे
कुल भंडारण में बढ़ोतरी के बावजूद करीब 35 प्रतिशत प्रमुख जलाशय अभी अपनी आधी क्षमता तक भी नहीं भर पाए हैं। यानी देश के एक बड़े हिस्से में जलाशयों का जलस्तर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। यह स्थिति क्षेत्रवार बारिश और मानसून की असमान स्थिति को भी दर्शाती है। जहां कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश के कारण जलाशयों में तेजी से पानी बढ़ा है, वहीं कम बारिश वाले इलाकों में जल भंडारण अपेक्षाकृत कम बना हुआ है।
पिछले साल से 18 प्रतिशत कम है पानी
जलाशयों में मौजूदा भंडारण भले ही कुल क्षमता के 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया हो, लेकिन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले स्थिति कमजोर है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में करीब 18 प्रतिशत कम है। वहीं, सामान्य भंडारण स्तर की तुलना में भी यह लगभग 3 प्रतिशत कम है।
20 अगस्त तक मानसून 13 प्रतिशत कम
20 अगस्त तक देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13 प्रतिशत कम रहा है। बारिश की कमी सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी बारिश सामान्य से 26 प्रतिशत कम रही है। इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
निम्न दबाव से बढ़ सकती है जलाशयों में पानी की आवक
मौसम की मौजूदा स्थिति जलाशयों के लिए कुछ राहत लेकर आ सकती है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के हिस्सों में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण बारिश होने की संभावना है। अगर इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है, तो जलाशयों में पानी की आवक और बढ़ सकती है। इससे आने वाले दिनों में प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में और सुधार देखने को मिल सकता है।