पूरे देश में सक्रिय हुआ मानसून, जुलाई के पहले नौ दिनों में सामान्य से 38% अधिक बारिश; खरीफ़ बुआई में तेज़ी की उम्मीद
जून महीने में कमज़ोर मानसून और सामान्य से काफ़ी कम बारिश के कारण खरीफ़ फसलों की बुआई प्रभावित हुई थी। कई राज्यों में किसानों को बारिश का इंतज़ार करना पड़ा, जिससे धान, दलहन और अन्य खरीफ़ फसलों की बुआई निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। हालांकि जुलाई की शुरुआत के साथ मानसून ने रफ़्तार पकड़ी है, जिससे खेती-किसानी के लिए राहत की उम्मीद जगी है।
भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई को पूरे देश को कवर कर लिया। यह सामान्य तिथि 8 जुलाई की तुलना में एक दिन देर से हुआ है। वहीं जुलाई के पहले नौ दिनों में देशभर में सामान्य से 38 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे आने वाले दिनों में खरीफ़ बुआई में तेज़ी आने की संभावना जताई जा रही है।
जुलाई में तेज़ हुई बारिश
भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों में भी आगे बढ़ गया है। इसके साथ ही 9 जुलाई 2026 को पूरे देश में मानसून पहुँच गया। सामान्य तौर पर मानसून 8 जुलाई तक पूरे भारत को कवर कर लेता है, लेकिन इस बार यह एक दिन की देरी से पूरा हुआ।
वर्ष 2000 के बाद से अब तक केवल छह बार ऐसा हुआ है, जब मानसून ने जून महीने के भीतर ही पूरे देश को कवर कर लिया था। सबसे पहले वर्ष 2013 में 16 जून को पूरे देश में मानसून पहुँच गया था। उस वर्ष पूरे मानसून सीज़न में सामान्य से 106 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं सबसे अधिक देरी वर्ष 2002 में हुई थी, जब मानसून 15 अगस्त को पूरे देश में पहुँचा था। मौसम विभाग ने जून से सितंबर के मानसून सीज़न के लिए इस वर्ष सामान्य वर्षा का 90 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया है।
जून में बारिश की कमी, लेकिन जुलाई में सुधरे हालात; खरीफ़ बुआई को मिल सकती है रफ़्तार
मौसम विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से 9 जुलाई के बीच देश में कुल 204.7 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि का दीर्घकालिक औसत (LPA) 239.1 मिमी है। यानी अब तक देशभर में वर्षा सामान्य से 14 प्रतिशत कम रही है। क्षेत्रवार देखें तो पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में 38 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा सामान्य से 9 प्रतिशत कम रही, जबकि मध्य भारत में 3 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। वहीं दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सामान्य से 15 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
देश के 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब भी वर्षा की कमी वाले क्षेत्र में हैं। इनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल और असम शामिल हैं। मौसम विभाग ने जून महीने की वर्षा के आँकड़ों में भी संशोधन किया है। पहले जून में वर्षा सामान्य से 40 प्रतिशत कम बताई गई थी, लेकिन बाद में विभिन्न स्थानों से अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद इसे संशोधित कर 37 प्रतिशत कम दर्ज किया गया।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 5 जुलाई तक खरीफ़ फसलों की बुआई का कुल रकबा 350.85 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 442.80 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार अब तक खरीफ़ बुआई लगभग 21 प्रतिशत कम हुई है। हालाँकि जुलाई मानसून का सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। इसी दौरान किसान खरीफ़ फसलों की सबसे ज़्यादा बुआई करते हैं और समय पर फसल तैयार होने के बाद नवंबर से पहले रबी फसलों की बुआई के लिए खेत भी तैयार कर लेते हैं। ऐसे में जुलाई के पहले नौ दिनों में हुई सामान्य से 38 प्रतिशत अधिक बारिश से आने वाले दिनों में खरीफ़ बुआई में तेज़ी आने की उम्मीद है।