मानसून सीजन का फीका आगाज़, पहले ही दिन 55% कम बारिश, जानें उम्मीदें अब क्यों 4 जून पर टिकीं

Gaon Connection | Jun 02, 2026, 15:29 IST
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि मानसून के पहले दिन देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की स्थिति सामान्य से कमजोर रही। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों की उम्मीदें बनी हुई हैं।
मानसून की धीमी दस्तक

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन की शुरुआत 1 जून से हो गई है, लेकिन पहले ही दिन बारिश का प्रदर्शन कमजोर रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, देशभर में वर्षा सामान्य से 55 प्रतिशत कम दर्ज की गई। 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में या तो कम बारिश हुई या बिल्कुल बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून तक केरल पहुंच सकता है।



देश के 63% क्षेत्र में बारिश की कमी

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून को केवल तीन राज्यों में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि चार राज्यों में अधिक और तीन राज्यों में सामान्य बारिश हुई। ये 10 राज्य देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का करीब 37 प्रतिशत हिस्सा हैं। दूसरी ओर, देश के 63 प्रतिशत क्षेत्र में बारिश की स्थिति कमजोर रही। चार राज्यों में बिल्कुल बारिश नहीं हुई, 16 राज्यों में अत्यधिक कमी और छह राज्यों में कमी वाली वर्षा दर्ज की गई।



मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में सूखा रहा मौसम

मध्य भारत में केवल छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हुई, जबकि अन्य राज्यों में मौसम शुष्क बना रहा। उत्तर-पश्चिम भारत में भी वर्षा की कमी दर्ज की गई, हालांकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर बारिश हुई। दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि केरल और कर्नाटक में बारिश सामान्य से कम रही।



प्री-मानसून बारिश सामान्य से अधिक

मार्च से मई के प्री-मानसून सीजन के दौरान देश में कुल 131.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 130.6 मिमी से एक प्रतिशत अधिक है। उत्तर-पश्चिम भारत को छोड़कर देश के अन्य सभी मौसमीय क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई।



4 जून तक केरल पहुंचने की संभावना

मौसम विभाग ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां मानसून की आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हैं। इसके चलते 4 जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल, तमिलनाडु, लक्षद्वीप, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। मानसून की प्रगति पर किसानों और कृषि क्षेत्र की नजर बनी हुई है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक इसकी समय पर आमद पर निर्भर करती है।

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